प्रतिबंधों से डरा नहीं, भड़का उत्तर कोरिया | दुनिया | DW | 07.08.2017
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दुनिया

प्रतिबंधों से डरा नहीं, भड़का उत्तर कोरिया

उत्तर कोरिया ने साफ कर दिया है कि संयुक्त राष्ट्र के कड़े प्रस्ताव उसे परमाणु हथियार बनाने से नहीं रोक सकेंगे. उत्तर कोरिया ने ये चेतावनी भी दी है कि अमेरिका की धमकियों में आ कर वह बातचीत के लिए तैयार नहीं होगा.

अमेरिका के तैयार किये प्रतिबंधों को सप्ताहांत में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एकमत से पारित कर दिया. उत्तर कोरिया को इन प्रतिबंधों के बाद हर साल एक अरब डॉलर का नुकसान होगा क्योंकि चीन से एक अहम साझेदारी पर रोक लग गयी है. उत्तर कोरिया की तरफ से सरकारी मीडिया में आये बयान में इन प्रतिबंधों को देश की, "संप्रभुता का घोर उल्लंघन" कहा गया है. कोरिया सेंट्रल न्यूज एजेंसी में आये बयान में यह भी कहा गया है, "हम आत्मरक्षा के लिए बने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत नहीं करेंगे." इसके साथ ही अमेरिकी धमकियों पर कहा गया है, "और अपनी परमाणु क्षमता को बढ़ाने से एक भी कदम पीछे नहीं हटेंगे." उत्तर कोरिया ने अमेरिका को "अपराधों का हजार गुना कीमत चुकाने" की धमकी भी दी है.

उत्तर कोरिया की तरफ से जब यह बयान आया, तब वहां के विदेश मंत्री रि योंग हो फिलीपींस की राजधानी मनीला में एक सिक्योरिटी फोरम की बैठक में शामिल होने गये हैं. इस फोरम में अमेरिका, चीन, रूस और दूसरे एशिया प्रशांत देशों के शीर्ष राजनयिक हिस्सा ले रहे हैं.

उधर, अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने सोमवार को उत्तर कोरिया के साथ बातचीत की मेज पर लौटने की संभावना से इनकार किया. टिलरसन के मुताबिक दुनिया ने दिखा दिया है कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों के लक्ष्यों से उसका धैर्य टूट रहा है. फोरम में टिलरसन ने कहा कि अमेरिका उत्तर कोरिया से बातचीत पर सिर्फ तभी लौटेगा जब वह अपना बैलिस्टिक मिसाल कार्यक्रम बंद कर देगा. टिलरसन ने कहा, "बातचीत पर वापस लौटने का सबसे अच्छा संकेत यही होगा कि वे अपने मिसाइल परीक्षण रोक दें."

टिलरसन ने माना कि आने वाले वक्त में उत्तर कोरिया और अमेरिका के दूत आपस में बातचीत करेंगे ताकि युद्ध को रोका जा सके. हालांकि उन्होंने यह बताने से इनकार कर दिया कि इसके लिए उत्तर कोरिया को लंबी दूरी की मिसाइलों से कितने दिनों तक दूर रहना पड़ेगा. उन्होंने कहा, "मैं किसी को कोई दिन या हफ्तों की संख्या नहीं बताने जा रहा हूं, दरअसल यह बातचीत की भावना पर निर्भर करेगा."

उत्तर कोरिया पर ये प्रतिबंध बीते महीने में दो बार अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षण के जवाब में लगाये गये हैं. इन परीक्षणों के बाद कहा गया कि उत्तर कोरिया के पास अमेरिका तक मार करने की क्षमता आ गयी है.

रविवार को टिलरसन ने बयान देने के बाद सभी विदेश मंत्रियों का स्वागत किया और इस दौरान उनकी रि योंग और उनके दक्षिण कोरियाई समकक्ष कांग क्यूंग व्हा से मुलाकात भी हुई. आमतौर पर ऐसी मुलाकात का अवसर बहुत विरले ही मिलता है. इस दौरान कांग ने रि से आग्रह किया कि वह सोल के उस सैन्य बातचीत के प्रस्ताव को स्वीकार कर लें जिसमें दोनों देशों में फंसे लोगों के परिवारों को मिलाने पर चर्चा होनी है. हालांकि दक्षिण कोरिया की योनहाप समाचार एजेंसी के मुताबिक रि ने कहा, "मौजूदा परिस्थितियों में उत्तर पर दबाव बनाने के लिए दक्षिण जिस तरह से अमेरिका के साथ मिल रहा है, उससे लगता है कि बातचीत के प्रस्ताव में जरूरी गंभीरता नहीं है."

इस बीच, रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय व्हाइट हाउस ने खबर दी है कि रविवार को ही राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति मून जेई इन के बीच फोन पर बात हुई है जिसमें दोनों देश इस बात पर एकमत हैं उत्तर कोरिया, "एक बढ़ता हुआ सीधे तौर पर खतरा है." बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्वीटर के जरिये रूस और चीन का धन्यवाद जताया कि उन्होंने सुरक्षा परिषद में उनका साथ दिया. अमेरिका ने हाल के दिनों में चीन पर इस बात के लिए दबाव बढ़ा दिया है कि वह उत्तर कोरिया पर लगाम लगाये. चीन ने हालांकि प्रस्ताव का समर्थन कर दिया लेकिन यह भी कहा कि केवल प्रतिबंधों से बात नहीं बनेगी, अमेरिका को उत्तर कोरिया से बातचीत करने पड़ेगी.

एनआर/एके (एएफपी)

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