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दुनिया

प्रतिबंधों पर ईरान का गुस्सा

सुरक्षा परिषदों के प्रतिबंधों को नकारते हुए ईरान ने कहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम जारी रहेगा. राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद चीन की यात्रा कर रहे हैं, लेकिन चीन के साथ ईरान के संबंधों में भी अब खटाई आ गई है.

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तुर्क राष्ट्रपति के साथ अहमदीनेजाद

राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने प्रतिबंधों को धत्ता बताते हुए कहा है कि ईरान के लिए वे कौड़ी के मोल के भी नहीं हैं. ताजिकस्तान की राजधानी दुशांबे में उन्होंने कहा कि वे विश्वसत्ताओं से पहले ही कह चुके हैं कि उनके ऐसे प्रस्ताव रद्दी कागज़ की तरह हैं, जिन्हें कूड़ेदान में फ़ेंक देना चाहिए.

दूसरी ओर, इन प्रतिबंधों के लिए ईरानी नेतृत्व को ज़िम्मेदार ठहराते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि इन्हें टाला जा सकता था.

यह परमाणु अस्त्रों के प्रसार को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिबद्धता का स्पष्ट संदेश भेजता है. फिर भी यह दिन अनिवार्य नहीं था. अपने प्रशासन के आरंभ से ही हमने स्पष्ट कर दिया था कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े सवालों के राजनयिक समाधान के लिए तैयार है. पारस्परिक हित व पारस्परिक आदर के आधार पर मैंने आगे बढ़ने का प्रस्ताव किया था. - बराक ओबामा

राष्ट्रपति ओबामा ने यह भी कहा कि प्रतिबंध के प्रस्ताव को एशिया, अफ़्रीका और लातिन अमेरिका के देशों, और रूस व चीन का भी समर्थन मिला है. बहरहाल, सुरक्षा परिषद में लेबनान तटस्थ रहा, जबकि ब्राज़ील व तुर्की ने इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ मतदान किया.

ईरान ने इस बीच कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी के साथ देश के संबंधों पर भी पुनर्विचार किया जा सकता है. प्रभावशाली सांसद अलाएद्दीन बोरुजेर्दी ने कहा कि रविवार को संसद में इस सिलसिले में एक विधेयक पर बहस होगी. परमाणु उर्जा एजेंसी में ईरान के राजदूत अली असगर सोलतानियेह ने इस पर ज़ोर दिया है कि यूरेनियम का संवर्धन रोका नहीं जाएगा.

सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का रूस और चीन के साथ ईरान के संबंधों पर निर्णायक असर पड़ेगा. प्रस्ताव में ईरान के साथ हथियारों के व्यापार पर प्रतिबंध का प्रावधान है. रूस ने कहा है कि अब वह ईरान को एस-300 प्रकार के मिसाइलों की आपूर्ति रोक देगा. प्रतिबंध के प्रस्ताव के समर्थन के कारण ईरान ने पहली बार चीन की भी आलोचना की है. देश के उपराष्ट्रपति व परमाणु उर्जा विभाग के प्रमुख अली अकबर सलेही ने कहा है कि चीन धीरे-धीरे इस्लामी दुनिया में अपनी सम्मानजनक स्थिति खोता जा रहा है और जब तक वह इस बारे में सचेत होगा, काफ़ी देर हो चुकी होगी. चीन की ओर से स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिश करते हुए कहा गया है कि वह ईरान के साथ संबंधों को काफ़ी महत्व देता है.

ऐसी स्थिति में आज से ईरानी राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की चीन यात्रा शुरू हो रही है. मेज़बान और मेहमान - दोनों के लिए एक मुश्किल यात्रा.

रिपोर्ट: एजेंसियां/उभ

संपादन: राम यादव

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