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जर्मन चुनाव

प्रतिद्वंद्वी नहीं है भारत और चीनः कृष्णा

चीन के दौरे पर भारत के विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कहा कि चीन और भारत प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं और कभी कभी एशिया के इन दो बड़े देशों के बीच मौजूद मतभेदों को "निहित स्वार्थों" की खातिर बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जाता है.

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'हिंदी चीनी भाई भाई' के मुताबिक कृष्णा के सुर

हाल के दिनों में चीन के साथ संबंधों में तनाव का कारण बने मुद्दों पर ज्यादा ध्यान देने की बजाय कृष्णा ने पेइचिंग दौरे में मेलमिलाप पर जोर दिया है. कश्मीरी नागरिकों को पासपोर्ट की बजाय एक अलग कागज पर वीजा देने, अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावों और सीमा के अतिक्रमण जैसे मुद्दों की वजह से भारत चीन के रिश्तों में तनातनी रही है.

भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि द्विपक्षीय रिश्ते "नियंत्रण में" हैं. साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों देश अलग हैं और उनके मतभेदों को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जाता है. पेइचिंग में एक थिंक टैंक में कृष्णा ने कहा, "अगर सच कहें तो इसके पीछे कुछ निहित स्वार्थ काम कर रहे हैं."

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के भारत के दावे पर समर्थन हासिल करने की कोशिश के तहत कृष्णा ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में सुधारों के बारे में चीन को अपनी नीति की समीक्षा करनी चाहिए और विश्व संस्था के कोर ग्रुप में अपने पड़ोसी के प्रवेश का स्वागत करना चाहिए. कृष्णा के मुताबिक, "दरअसल संयुक्त राष्ट्र में सुधार जैसे जटिल मुद्दे पर भी चीन को अपनी पुरानी नीति पर दोबारा विचार करना चाहिए और उस देश को सुरक्षा परिषद में आने देना चाहिए जिसके साथ वह बहुत कुछ साझा करता है."

कृष्णा ने कहा कि दोनों देशों ने सीमा विवाद पर "खासी प्रगति" की है. साथ ही दोनों पक्षों को बकाया मुद्दे के हल के लिए भी संयम से काम लेना चाहिए और परिपक्वता दिखानी चाहिए. उन्होंने कहा, "ऐसे मामलों में समय तो लगता ही है और संयम से ही काम लेना होगा. विशेष प्रतिनिधि अपनी जिम्मेदारियों से बखूबी वाकिफ हैं और हमें उम्मीद है कि ऐसा कोई हल निकलेगा जो दोनों पक्षों को मंजूर होगा."

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः एस गौड़

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