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मनोरंजन

पोप के शहर वालों का दुख

पोप बेनेडिक्ट रिटायरमेंट के बाद कहां रहेंगे, कैसे वक्त गुजारेंगे और क्या होगा उनकी अंगूठी का? रिटायरमेंट की बात सुनकर किस सोच में पड़ गए हैं उनके जन्मस्थल मार्क्टल के लोग? पोप के इस्तीफे ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं.

मार्क्टल दक्षिणी जर्मनी के बवेरिया प्रांत का छोटा सा शहर है. पोप बेनेडिक्ट 16वें का जन्म 1927 में यहीं हुआ था. जब से वे पोप बने हैं यह शहर कैथोलिकों की तीर्थस्थली बन गया है. मार्क्टल के मेयर हूबर्ट श्वेंटनर कहते हैं कि पोप बेनेडिक्ट के पोप बनने के बाद शुरुआती दो सालों तक हर साल लगभग दो लाख लोग यहां आया करते थे. उन्हें इस बात की कतई चिंता नहीं कि इस्तीफे से यहां लोगों का आना बंद हो जाएगा. उन्हें लगता है आगे भी पर्यटक मार्क्टल आते रहेंगे. श्वेंटनर ने बताया कि उन्हें पोप के अप्रत्याशित फैसले ने हैरान कर दिया था, क्योंकि जून में जब वह आखिरी बार पोप बेनेडिक्ट से मिले थे तब वे स्वस्थ दिख रहे थे. उन्होंने कहा, "85 साल की उम्र में हर दिन चुस्त दुरुस्त रहना बेहद मुश्किल काम है."

जन्मस्थान में प्यार

जर्मनी में पोप के जन्मस्थल मार्क्टल में रहने वाली कारोलीन नौएमायर को आज भी वह दिन याद है जब वह शहर के सबसे मशहूर व्यक्ति से मिली थीं, जो पोप बेनेडिक्ट 16वें के रूप में मशहूर हुए. कारोलीन ने बताया, "2006 में जब वह मार्क्टल में थे तो वो अपने घर से बाहर निकले और खुद चलकर मेरे और मेरे साथियों के पास आए. हमारे लिए वह एक बेहद खूबसूरत लम्हा था." उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पहली बार सुना कि पोप ने इस्तीफा दे दिया है तो उन्हें लगा किसी ने कार्निवाल के मौके पर मजाक किया है. वह आगे कहती हैं, "मुझे इस खबर से बहुत दुख हुआ क्योंकि वह बहुत लम्बे समय तक पोप के पद पर नहीं रहे."

मार्क्टल में ही रहने वाली 60 साल की बुजुर्ग कारीन फ्रॉवेनडॉर्फर रूंधे गले से कहती हैं, "यह हमारे लिए बहुत बुरी खबर है लेकिन उनके खराब स्वास्थ्य को देखते हुए ठीक भी है." वह मानती हैं कि पोप के फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए.

कारोबारियों को धक्का

मार्क्टल के गिरजाघर के पादरी योजेफ काइजर भी मानते हैं कि पोप बेनेडिक्ट के चुने जाने के बाद से शहर में सैलानियों का तांता लगा रहता था. लेकिन अब वह कम हो सकता है. यहां पोप के नाम की बियर और ब्रेड बेच कर भी कारोबारियों ने उनके नाम से काफी फायदा उठाया. पादरी योजेफ काइजर बताते हैं कि मार्क्टल में पोप से पहले कुछ भी बड़ा या आकर्षित करने वाला नहीं था, यहां तक कि खुद का पोस्टकार्ड भी नहीं. उन्होंने कहा, "मैं पोप बियर नहीं पीता लेकिन मेरे लिए यह बहुत खुशी की बात है कि जर्मन पोप का बपतिस्मा हमारे चर्च में हुआ था."

Papst-Markeing

दुकानदारों को चिंता है कि पोप के नाम पर बिकने वाली बियर और ब्रेड की बिक्री में कमी आएगी.

शहर के कुछ दुकानदारों को यह भी चिंता है कि बेनेडिक्ट के अब पोप न रहने से उनके कारोबार पर असर पड़ सकता है. मार्क्टल की एक बेकरी के मालिक कहते हैं कि पोप के रहते बिकने वाली 'वैटिकन ब्रेड' में भी लोगों की अब कोई खास दिलचस्पी नहीं रह गई है. उनके अनुसार पोप के इस्तीफे से शहर के कारोबार को धक्का लगेगा.

कहां रहेंगे पोप

वैटिकन में पोप का नया घर तैयारी के करीब है. मठ के बराबर में बनी इस चार मंजिला इमारत में पहले ननें रहा करती थीं. पिछले कई महीनों से यहां मरम्मत का काम चल रहा है. पोप के इस फैसले के बारे में वैटिकन के कुछ ही अधिकारियों को पहले से पता था कि पोप इस्तीफा देने का बाद यहां रहेंगे. इस हफ्ते पोप ने इसकी घोषणा की और अपने स्वास्थ को इस फैसले की वजह बताया. वैटिकन के प्रवक्ता फेडेरिको लोम्बार्डी ने पहली बार यह बात भी बताई कि पिछले कई सालों से पोप के पेसमेकर लगा है, जिसकी कुछ महीने पहले बैटरी भी बदली गई थी.

वैटिकन के एक अखबार के संपादक जोवानी मारिया विआन कहते हैं, "जब इस इमारत की मरम्मत शुरू हुई तो लोगों को लगा कि शायद यहां कुछ नई नन आकर रहने वाली हैं. लेकिन यह तैयारी पोप के रहने के लिए चल रही थी. यह बड़े अधिकारियों की गोपनीयता के प्रति ईमानदारी भी दिखाता है कि उनको पता होने के बाद भी यह बात पहले सामने नहीं आई." पोप बेनेडिक्ट के भाई गियोर्ग रात्सिंगर ने भी इस बात की पुष्टि की कि उनके भाई का मार्क्टल वापस आकर रहने का कोई इरादा नहीं है. 28 फरवरी को पोप के रिटायरमेंट के बाद उनकी अंगूठी नष्ट कर दी जाएगी जो हमेशा पोप की मृत्यु पर नष्ट कर दी जाती है.

एसएफ/एमजे (एएफपी,एपी)

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