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दुनिया

पोप की विज्ञान अकादमी के प्रोटेस्टेंट अध्यक्ष

पहली बार एक प्रोटेस्टेंट वैज्ञानिक वेटिकन की विज्ञान अकादमी के प्रधान चुने गए हैं. पोप बेनेडिक्ट के आदेश के अनुसार स्विट्जरलैंड के नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक वैर्नर आर्बर अब सदियों पुरानी इस अकादमी के अध्यक्ष होंगे.

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यह पहला मौका है कि किसी गैर कैथलिक को सन 1603 में स्थापित इस कैथलिक विज्ञान अकादमी का प्रधान बनाया जाएगा. स्विट्जरलैंड के 81 वर्षीय माइक्रो बायोलॉजिस्ट वैर्नर आर्बर को 1978 में मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार मिला था. वह बासेल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हैं.

पोप की विज्ञान अकादमी में लगभग 30 नोबेल पुरस्कार विजेताओं सहित 80 वैज्ञानिक सदस्य हैं. वैर्नर आर्बर 1981 से इसके सदस्य हैं और वह अकादमी के निदेशक मंडल में भी शामिल हैं. अकादमी का मुख्य काम 6 क्षेत्रों में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना है, जिनमें मूल विज्ञान, विकासशील देशों की समस्याओं पर केंद्रित वैज्ञानिक अनुसंधान, पर्यावरण समस्या व वैज्ञानिक नैतिकता जैसे विषय शामिल हैं. प्रत्यक्ष रूप से पोप के अधीन काम करने वाली यह संस्था अपने आपको एक स्वतंत्र संस्था कहती है. वेटिकन के अनुसार इसे अनुसंधान के क्षेत्र में पूरी स्वतंत्रता मिली हुई है.

भारतीय मूल के 6 वैज्ञानिक पोप की विज्ञान अकादमी के सदस्य हैं: खगोल शास्त्री कृष्णस्वामी कस्तूरीरंगन, नोबेल पुररस्कार विजेता बायोकेमिस्ट हरगोबिंद खुराना, भौतिक शास्त्री गोविंद कुमार मेनन, जलवायु वैज्ञानिक वीरभद्रन रमानाथ, रसायन शास्त्री एनआर राव और खगोल भौतिकशास्त्री गोविंद स्वरूप. अकादमी का मुख्यालय वेटिकन में स्थित है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/उ भट्टाचार्य

संपादन: वी कुमार

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