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खेल

पोप की यात्रा ने खोली पोल

फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए ब्राजील के पास अब 10 महीने से भी कम का समय बचा है. और रियो में ओलंपिक खेलों के लिए तीन साल का इस बीच पोप की यात्रा में हुई गड़बड़ी ने तैयारियों की पोल खोल दी है.

वैसे तो इन खेलों का आयोजन किसी भी देश के लिए अच्छा मौका हो सकता है लेकिन कंफेडरेशन कप के दौरान जून में भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद पोप फ्रांसिस की यात्रा में हुई गड़बड़ियों ने शहर के प्रबंधन पर एक बार फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं.

रियो के बड़े अखबार ओ ग्लोबो ने अपने संपादकीय में पोप की यात्रा का मुद्दा उठाया जिसमें भारी ट्रैफिक जाम, बिजली कटौती और अंडरग्राउंड सिस्टम में भारी भीड़ को संभालना बड़ी मुश्किल साबित हुई. गड़बड़ी तब शुरू हुई जब पोप का काफिला गलत रास्ते पर मुड़ गया. उनकी कार हजारों श्रद्धालुओं के बीच फंस गई और सुरक्षा एजेंट पोप के पीछे भागते रह गए. अखबार के मुताबिक, "पोप का आना और सब वे की भीड़ देश के अच्छे मेजबान होने पर शंका खड़ी करती है. "

ब्राजील वर्ल्ड कप पर करीब 13.3 अरब डॉलर खर्च कर रहा है. लोगों का गुस्सा 12 ऐसे स्टेडियमों पर है जो या तो नए बनाए जा रहे हैं या जिनमें सुधार किया जा रहा है. इनमें से चार ऐसे हैं जो बाद में किसी काम के नहीं रह जाएंगे. वर्ल्ड फुटबॉल संगठन फीफा को सिर्फ आठ स्टेडियमों की जरूरत है. ओलंपिक आयोजकों ने अभी तक अपने बजट की घोषणा नहीं की है लेकिन जनता को लगता है कि उनका खर्च भी ऐसा ही होगा या फिर इससे ज्यादा.

रियो की आयोजन समिति के लियो ग्रिनर के हवाले से एपी समाचार एजेंसी ने खबर दी है कि निजी और सार्वजनिक निवेश के साथ संभावित खर्च करीब 11.6 अरब डॉलर से 35 फीसदी ज्यादा हो सकता है. उन्होंने कहा कि यह महंगाई और ब्राजीलियाई मुद्रा की कीमत के कारण हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआती खर्च में रियो के सबवे के विकास के लिए जरूरी चार अरब डॉलर शामिल नहीं थे. अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के याक रोगे ने कहा था कि ओलंपिक खेलों के जरिए रियो के बुनियादी ढांचे को विकसित करने की कोशिश की जाएगी.

पांच अगस्त 2016 को ओलंपिक खेलों की शुरुआत होनी है जिसके बाद पैराओलंपिक गेम्स होंगे. ब्राजील में होने वाले विरोधों का कारण थोड़ा अलग है और नहीं भी. ब्राजील का बुनियादी ढांचा बहुत ही जर्जर हालत में है और जनता को ऐसा लगता है कि उसके पैसे का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है और ऐसी जगह खर्च किया जा रहा है जहां जरूरत नहीं.
दुनिया भर के कई बड़े आयोजनों से पहले विरोध प्रदर्शन हुए हैं लेकिन खेल और अर्थव्यवस्था को जाने वाले भी अकसर प्रदर्शनकारियों से सहमति रखते हैं. वो मानते हैं कि ओलंपिक और वर्ल्ड कप जैसे खेल पर्यटन या अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए ज्यादा काम नहीं आते. अच्छी योजना के साथ हालांकि उनके जरिए लंबे समय के लिए बुनियादी ढांचा जरूरत विकसित हो सकती है.

1992 के बार्सिलोना ओलंपिक गेम्स बहुत सफल माने जाते हैं. नक्शे पर अनजान शहरों की भी सड़कें, रास्ते, पार्क और बंदरगाह इस दौरान बने थे. 2008 के बीजिंग ओलंपिक खेलों के कारण नई सबवे लाइन्स और एक बड़ा एयरपोर्ट अब बेकार पड़ा है. 50 करोड़ डॉलर वाला बर्ड्स नेस्ट स्टेडियम भी अब बस इंतजार में ही खड़ा है. एथेंस में भी 2004 के ओलंपिक में बने कई स्टेडियम अलग थलग पड़े हुए हैं.

मैसेचुसेट्स में नॉर्थहेम्प्टन के स्मिथ कॉलेज में खेल अर्थशास्त्री एंड्र्यू जिम्बालिस्ट कहते हैं, "एक शहर के तौर पर बार्सिलोना बढ़िया था जिसे तब तक किसी ने पूरी तरह नहीं देखा था. जब तक आप शानदार पॉलिटिकल मैनेजमेंट के साथ नहीं हों तो इस तरह के खेलों को आर्थिक तौर पर सकारात्मक खेलों में तब्दील करना मुश्किल होता है."

बीजिंग में आने वाले लोगों में अधिकतर स्थानीय ही थे. यूरोपीय टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन के मुताबिक 2008 के ओलंपिक खेलों ने चीन की राजधानी में पर्यटन को नष्ट कर दिया था. मैसेचुसेट्स के एक अन्य खेल अर्थशास्त्री विक्टर मैथेसन का कहना है, "बिजनेस और कंस्ट्रक्शन कंपनियों को कुछ मिल जाता है. नेताओं को कुछ बड़ा मिल जाता है. करदाताओं को होने वाला नुकसान कम है और यह इतना बंट जाता है कि किसी को भी शिकायत करने का मौका नहीं मिलता."

हैम्बर्ग यूनिवर्सिटी में वोल्फगांग मैनिंग कहते हैं कि इस तरह के मेगा इवेंट लाभ करवाते हैं ऐसा सोचना गलत है. "ऐसा नहीं हैं, कम से कम सरकार के लिए तो बिलकुल ही नहीं."

जर्मनी में सभी कहेंगे कि 2006 का वर्ल्ड कप अच्छा था. आपको किसी को ये साबित करने की जरूरत नहीं थी कि आप वर्ल्ड कप करके पैसे नहीं कमाते. इसमें काफी मजा था लेकिन इसकी कीमत क्या थी, ये अलग सवाल है.

एएम/एनआर (एपी)

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