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ताना बाना

पॉस्को प्रोजेक्ट को रमेश की हरी झंडी

भारत ने कुछ शर्तों के साथ पॉस्को के स्टील प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है. 12 अरब डॉलर का यह प्रोजेक्ट भारत में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश हैं. पॉस्को फैसले के बाद अन्य कंपनियों को भी सरकार की हरी झंडी का इंतजार.

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दक्षिण कोरिया की कंपनी पॉस्को को आखिरकार वन एवं पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश की हरी झंडी मिल ही गई. सरकार के मुताबिक कई शर्तों के साथ पॉस्को को उड़ीसा में प्लांट बनाने की इजाजत दी गई है. केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद अब उड़ीसा सरकार पॉस्को प्रोजेक्ट के लिए तुरंत जमीन अधिग्रहण शुरू कर सकती है.

पॉस्को उड़ीसा में 12 अरब डॉलर खर्च कर स्टील मिल बनाना चाहती है. परियोजना शुरू करने के लिए कंपनी पिछले कई साल से इंतजार कर रही है. कंपनी को स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. आरोप हैं कि पॉस्को की मिल हजारों गरीब परिवारों के लिए मिल के आस पास रहना मुश्किल कर देगी. पर्यावरण मंत्रालय की हरी झंडी के बाद भी पॉस्को की मुश्किलें बहुत कम नहीं हुई हैं. पॉस्को प्रोजेक्ट को लेकर उड़ीसा सरकार के खिलाफ भी मुकदमे चल रहे हैं. यह मुकदमे पॉस्को प्रोजेक्ट को और देर तक खींच सकते हैं.

बहरहाल, पॉस्को पर हुए फैसले के बाद भारत सरकार के रवैये से झल्लाई बैठी अन्य कंपनियों को नई उम्मीद बंधी हैं. पॉस्को, वोडाफोन और वाल मार्ट स्टोर्स जैसी कंपनियां चाहती है कि सरकार उनके मुताबिक नियमों में कुछ बदलाव करे. ऐसा न होने पर भारत में हो रहे विदेशी निवेश पर थोड़ा फर्क पड़ रहा है.

भ्रष्टाचार की वजह से कई कंपनियों की सोच में अंतर आया है. पश्चिमी कंपनियों के लिए भारत एक आकर्षक बाजार है, जहां मुश्किलें भी कम नहीं है. वहीं निवेश को लेकर सरकार में मौजूद पार्टियां भी फूंक फूंक कर कदम रख रही हैं. पश्चिम बंगाल का सिंगूर इस बात का सटीक उदाहरण हैं. टाटा नैनो के लिए बनाए जा रहे प्लांट को लेकर वहां ऐसा विवाद हुआ कि बंगाल में वामपंथ का लाल रंग ही फीका पड़ गया.

रिपोर्टः रॉयटर्स/ओ सिंह

संपादनः महेश झा

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