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दुनिया

पॉप स्टार या ऑटिस्ट, सबके लिए वेब स्कूल

जर्मन शहर बोखुम में एक वेब स्कूल है जो ऐसे बच्चों की स्कूल पास करने में मदद करता है जो सामान्य स्कूलों में पढ़ नहीं पाते. यह इंटरनेट स्कूल जर्मनी में अपने तरह का अकेला स्कूल है.

जर्मनी में इस समय गर्मी की छुट्टियां हैं, लेकिन म्यूनिख की 13 वर्षीया लिली के लिए इसके कोई मायने नहीं. उसका स्कूल अभी भी चल रहा है, हालांकि वह इन दिनों छुट्टियां बिता रही है. साल के तीन महीने वह तोंगा में गुजारती है जहां उसके माता-पिता एक होटल चलाते हैं. घर से हजारों किलामीटर दूर होने के बावजूद वह अपने शिक्षक रोबिन शाडे के साथ कंप्यूटर पर गणित और अंग्रेजी ग्रामर सीखती है. जर्मनी में जब शाम होती है, रोबिन शाडे उसके साथ बोखुम से स्काइप पर जुड़े होते हैं.

लिली जब जर्मनी में होती है तो वह म्यूनिख के एक हायर सेकंडरी स्कूल में जाती है. पढ़ाई को नुकसान न पहुंचे इसलिए वह तोंगा में भी बोखुम के वेब स्कूल के जरिए अपनी पढ़ाई जारी रखती है. लिली बताती है, "मैंने तीन साल पहले इसकी शुरुआत की, यह ठीक ठाक चल रहा है." पढ़ाई में उसकी मदद बोखुम के वेब स्कूल के दो शिक्षक करते हैं. लिली के पिता कहते हैं, "इस ट्यूशन के बिना हम अपनी बेटी को इतने लंबे समय के लिए तोंगा साथ नहीं ला सकते थे."

Schule ohne Klassenzimmer web-individualschule

शिक्षक

सात समंदर पार

स्कूल में सात शिक्षक 9 साल से 22 साल की उम्र के करीब 90 छात्रों को पढ़ाते हैं. यह स्कूल 11 साल पहले बना था ताकि ऐसे बच्चों की स्कूल पास करने में मदद की जा सके जो आम तौर पर नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाते. यह एक प्राइवेट स्कूल है लेकिन उसे परीक्षा लेने और रिजल्ट देने का अधिकार नहीं है. बच्चे अपनी परीक्षा पार्टनर स्कूलों में सरकारी परीक्षा आयोग के सामने देते हैं. अब तक इस वेब स्कूल से 150 छात्रों ने स्कूली शिक्षा पूरी की है और अब तक कोई फेल नहीं हुआ है.

इस स्कूल के सबसे नामी छात्रों में बिल और टॉम काउलित्स हैं जो जर्मनी के विख्यात म्यूजिक बैंड टोक्यो होटल के सदस्य हैं. भले ही वे कंसर्ट टूर पर जापान या अमेरिका में रहे हों, जर्मन, गणित, अंग्रेजी और भूगोल जैसे विषयों की पढ़ाई वे अपने होटल के कमरे में नियमित रूप से करते थे. समय में फर्क के बावजूद उनके शिक्षक उनके साथ संपर्क में रहते थे और पढ़ाई के बारे में लगातार पूछते रहते थे. वेब स्कूल के छात्रों में ऐसे बच्चे भी शामिल हैं जिनके माता-पिता किसी जर्मन कंपनी के लिए विदेशों में काम करते हैं.

हर छात्र पर ध्यान

लेकिन वेब स्कूल में दाखिल ज्यादातर छात्र ऐसे हैं जो किसी ऐसी बीमारी का शिकार हैं कि वे नियमित स्कूलों में नहीं जा सकते. उनके लिए स्कूल का 780 यूरो का मासिक खर्च युवा कल्याण दफ्तर उठाता है. जब गैर्ड लिष्टनबर्गर ने स्कूल खोला था तो उनके दिमाग में ऐसे ही छात्रों की मदद का विचार था. शुरू में परीक्षा के लिए उनकी मदद ईमेल के जरिए की जाती थी. लेकिन 2004 में उनकी बेटी सैरा ने स्कूल की जिम्मेदारी संभाली और यह प्रथा बदल दी. अब छात्रों को स्काइप के अलावा चैट और मोबाइल फोन के जरिए पढ़ाया जाता है.

स्कूल के सात शिक्षक बोखुम और आसपास के इलाके में रहते हैं. वे सामान्य स्कूलों में भी पढ़ा सकते थे लेकिन उन्होंने वेब स्कूल के लिए काम करने का फैसला लिया. दो शिक्षकों को तो सैरा लिष्टेनबर्गर सरकारी स्कूलों से लेकर आई हैं, "हमें तुरंत महसूस हुआ कि वे इंटरनेट के माध्यम से बच्चों तक पहुंच सकते हैं और प्रोत्साहित कर सकते हैं." दी जाने वाली परीक्षा के हिसाब से एक शिक्षक एक छात्र की मदद करता है.

शिक्षकों की मदद

अन्ना गेबर्स-फ्रिचे दो साल से 12 वर्षीय लियोन को पढ़ा रही हैं. आसपैर्गर ऑटिस्ट होने के नाते अपने शहर के स्कूल में उसका कतई मन नहीं लगता था. इस बीच वह गेबर्स-फ्रिचे के साथ स्काइप की मदद से मन लगाकर सीखता है. शिक्षिका को इस पर कोई आश्चर्य नहीं होता, "बीच के माध्यम के रूप में मोनीटर आसपैर्गर ऑटिस्ट लोगों को दूसरों के साथ संप्रक स्तानित करना आसान बनाता है." सामान्य स्कूल में वे लोगों से संपर्क करने में घबराते हैं. यहां के शिक्षकों को आसपैर्गर ऑटिस्ट बच्चों को पढ़ाने की अतिरिक्त योग्यता है.

इसके अलावा शिक्षकों की मदद के लिए एक मनोवैज्ञानिक भी है जो बताता है कि विभिन्न बीमारी वाले छात्रों के साथ किस तरह से पेश आया जाए. वेब स्कूल में सामान्य किताबों से नहीं पढ़ाया जाता. शिक्षक उस तरह की पाठ्य सामग्री तैयार करते हैं जिनमें छात्रों की दिलचस्पी होती है. अगर बच्चे की दिलचस्पी फॉर्मूला वन मोटर रेस में है तो गणित का सवाल होता है कि विश्व चैंपियन सेबास्टियान फेटल साल में कितने किलोमीटर गाड़ी दौड़ाते हैं. और भूगोल की पढ़ाई उन देशों के जरिए होती है जहां फॉर्मूला वन की रेस होती है.

इस स्कूल से पास करने वालों में 19 वर्षीय लिन माक्स केम्पेन भी है जो पेशेवर टेनिस खिलाड़ी है. लिन माक्स का कहना है कि सीखने के इस तरीके की वजह से ही वह हर दिन छह घंटे की ट्रेनिंग और टूर्नामेंट के सिलसिले में दुनिया भर की सैर के बावजूद पढ़ाई कर पाया. इस बीच उसने हाई स्कूल पास कर लिया है.

रिपोर्ट: क्लाउस डॉयजे/एमजे

संपादन: ईशा भाटिया

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