पैसे नहीं तो पदक कहां से | खेल | DW | 04.02.2013
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खेल

पैसे नहीं तो पदक कहां से

भारत के एकमात्र विश्वस्तरीय शीतकालीन खिलाड़ी शिव केशवन का पैसे के अभाव में विंटर ओलंपिक में भाग लेना संदेह में है. उन्होंने हाल ही में एशियाई रिकॉर्ड बनाया है.

केशवन ल्यूज दौड़ में हिस्सा लेते हैं जो स्केट पर लेटकर बर्फ पर होने वाली दौड़ है. उन्होंने पिछले दिसंबर में जापान के नागानो में हुए एशिया कप में 49.59 सेकेंड का एशियाई रिकॉर्ड बनाकर अपना स्वर्ण पदक फिर से जीता है. लेकिन अगले महीने रूस के सोची में होने वाले शीतकालीन ओलंपिक में पदक के लिए वे धन के अभाव में प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे.

32 वर्षीय केशवन ने कहा है कि खेल मंत्रालय ने पैसे देने का अपना आश्वासन पूरी तरह नहीं निभाया है और उन्हें उम्मीद का सिर्फ पांच फीसदी मिला है. समाचार एजेंसी एपी से केशवन ने कहा, "मौखिक आश्वासन और असली मदद में भारी अंतर है." वे इस समय फ्रांस के अल्बेयरविल में प्रैक्टिस कर रहे हैं. "पिछले सीजन का कोई भी खर्चा सरकार ने भुगतान नहीं किया है. पिछले चार महीनों में मुझे ट्रेनिंग देने वाले कोच ने इस्तीफा दे दिया है क्योंकि उसे उनकी तनख्वाह नहीं मिली है."

शिव केशवन की मां इटली की हैं. वे इटली के लिए भी खेल सकते थे, लेकिन उन्हें इसका मलाल नहीं है कि वे भारत के लिए खेल रहे हैं. भारत के उत्तरी हिल स्टेशन मनाली में रहने वाले केशवन कहते हैं, "मैं अपने फैसले से बहुत खुश हूं, क्योंकि मुझे नहीं लगता कि किसी दूसरे देश का प्रतिनिधित्व कर मुझे इस तरह का संतोष मिलता. मैं अपने देश के लिए भविष्य में भी ज्यादा योगदान देना चाहता हूं, हालांकि मुझे पता है कि यह रास्ता मुश्किलों से भरा है."

वह बताते हैं कि इटली के खिलाड़ी बहुत पेशेवर हैं, जहां उनका अच्छा खयाल रखता है, उन्हें सेना, पुलिस और दूसरे संस्थानों में अधिकारी का पद दिया जाता है ताकि उन्हें तनख्वाह और पेंशन की गारंटी हो सके. ऐसे में ओलंपिक गोल्ड मेडल पाने की अच्छी संभावना होती है. "फिर भी कुछ अनजान वजहों से जब आप अपने देश का प्रतिनिधित्व करते हैं तो अलग किस्म की भावना होती है."

केशवन पर पिछले साल एक दस्तावेजी फिल्म बनाने वाले पत्रकार जसविंदर सिद्धू उनकी प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि इस बात का ध्यान रखते हुए कि अपने खेल के बारे में बताना भी उनके लिए एक चुनौती रही है, उनकी उपलब्धियां बहुत बड़ी हैं. सिद्धू का कहना है कि खिलाड़ी के रूप में केशवन के विकास में उनके माता पिता के समर्थन के अलावा उनकी पत्नी नमिता के समर्थन की भी बड़ी भूमिका है. नमिता के पास बिजनेस के अलावा लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से ऑर्गेनाइजेशनल साइकोलॉजी की डिग्री है.

एमजे/एजेए (एपी)

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