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दुनिया

पैराडाइज पेपरों में ब्रिटिश महारानी समेत कई नेताओं का नाम

ऐसे 1.34 करोड़ गोपनीय दस्तावेज जारी हुए हैं जिनमें बड़े राजनेताओं और बेहद अमीर लोगों के टैक्स चुराने के ब्यौरे सामने आये हैं. इनमें अमेरिका की ट्रंप सरकार में शामिल कई लोगों के नाम भी शामिल हैं.

जर्मन मीडिया के मुताबिक 67 देशों के लगभग 400 पत्रकारों ने ये 1.34 दस्तावेज खोज कर निकाले हैं जिनसे पता चलता है कि दुनिया के बेहद अमीर लोग और बड़े बड़े राजनेता टैक्स बचाने के लिए क्या क्या तरकीबें अपनाते हैं. यह लीक जानकारी जर्मन अखबार ज्यूडडॉयचे त्साइटुंग को भी मिली है, जिसका कहना है कि ज्यादातर मामले एपलबाई नाम की एक ऑफशोर कंपनी से जुड़े हैं, जिसका गठन बरमुडा में किया गया. लेकिन इसके दफ्तर दुनिया में कई जगहों पर हैं. कंपनी ने पिछले महीने बताया कि उसे हैक कर लिया गया है.

इन दस्तावेजों को पैरे़डाइज पेपर कहा जा रहा है. इनसे अमेरिका की ट्रंप सरकार के सदस्यों के रूसी कंपनियों से संबंधों के बारे में भी पता चलता है. दस्तावेज बताते हैं कि नाइकी, एप्पल, उबर और फेसबुक जैसी नामी कंपनियों का इस्तेमाल करते हुए कैसे टैक्स बचाया जा रहा है. ज्यूडडॉयचे त्साइटुंग का कहना है कि विदेशों में गुपचुप तरीके से पैसा जमा करने वालों में रॉक स्टार बोनो के साथ साथ ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की कुछ निजी संपत्तियां भी शामिल हैं. अखबार के मुताबिक 47 देशों के 120 राजनेता टैक्स चुराने की इस स्कीम में शामिल हैं.

अर्थशास्त्री गाब्रिएल सुकमान ने ज्यूडडॉयचे त्साइटुंग को बताया कि दुनिया के बड़े लोगों ने लगभग 7.9 ट्रिलियन की रकम विदेशों में छिपा कर रखी है. अमेरिका के इंटरनेशनल कंसोरटियम ऑफ इंवेस्टीगेटिव जर्नलिस्ट के साथ मिल कर दुनिया के कई मीडिया संस्थानों ने इस लीक जानकारी को छापा है. इन दस्तावेजों से पता चलता है कि अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बुर रोस के संबंध रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी लोगों से हैं.

दस्तावेजों से यह भी पता चला है कि पूर्व जर्मन चांसलर गेरहार्ड श्रोएडर एक ऑफशोर कंपनी के प्रबंधन से जुड़े रहे हैं. 2009 में वह रूसी-ब्रिटिश ऊर्जा कंपनी टीएनके-बीपी के तथाकथित इंडिपेंडेंट सुपरवाइजरी बोर्ड के हिस्सा थे. बताया जाता है कि श्रोएडर और बोर्ड में शामिल दो लोगों ने एपलबाई से संपर्क किया था. 2011 में श्रोएडर बोर्ड से हट गये थे. ज्यूड डॉयचे त्साइटुंग ने दुनिया के कई अन्य अखबारों के साथ मिल कर पनामा पेपर्स जारी किये थे जिससे कई सनसनीखेज मामले आये थे.

(सबसे ज्यादा टैक्स वाले देश)

रेबेका स्टाउडेनमायर/एके

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