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मनोरंजन

पैदल चलिए, दिल नहीं बैठेगा

बस 20 मिनट की बात है. अगर दिन भर में इतना सा वक्त निकाल लिया, तो फिर दिल का दौरा पड़ने की आशंका बहुत कम हो सकती है. उन लोगों को भी, जिन्हें शूगर की बीमारी होने का खतरा है.

शरीर जब ग्लूकोज को पचा नहीं पाता तो उसे ग्लूकोज इंटॉलरेंस कहते हैं. आईजीटी को दूर करने के उद्देश्य से एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सर्वे किया गया है. इसके नतीजे बताते हैं कि अगर साल भर तक हर रोज सिर्फ 2000 कदम चल लिया जाए, तो दिल की बीमारी होने का खतरा बहुत कम हो सकता है. दुनिया भर के करीब 35 करोड़ लोग आईजीटी से जूझ रहे हैं, जो संख्या कुल वयस्क आबादी का आठ प्रतिशत है. समझा जाता है कि 2030 तक 47 करोड़ से ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं.

ब्रिटेन की लिस्टर यूनिवर्सिटी के थॉमस येट्स का मानना है, "आईजीटी की परेशानी वाले लोगों को दिल की बीमारी होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है. बहुत से अध्ययन से पता चला है कि कसरत से इसमें फायदा पहुंचता है. लेकिन यह पहला सर्वे है, जिसके मुताबिक बताया जा सका है कि कितनी कसरत से दिल का दौरा, स्ट्रोक या दिल की दूसरी बीमारी से बचा जा सकता है."

40 देशों में टेस्ट

येट्स की टीम ने 40 देशों के 9300 वयस्कों के आंकड़े जमा किए, जिन्हें या तो आईजीटी की शिकायत है या जिन्हें दिल का दौरा पड़ चुका है या इन दोनों में से कोई एक परेशानी है. सभी लोगों से जीवनशैली बदलने को कहा गया, वजन कम करने को कहा गया और हफ्ते में ढाई घंटा ज्यादा शारीरिक अभ्यास करने को कहा गया.

शोधकर्ताओं ने अध्ययन के शुरू और 12 महीने बाद आखिर में पैदल चलने की गतिविधि पर ध्यान दिया. इसके बाद नतीजे तक पहुंचने से पहले उन्होंने लोगों के दूसरे तथ्यों को भी जोड़ा. मसलन क्या वे शराब या सिगरेट पीते हैं, वजन उनके शारीरिक अनुपात के हिसाब से है या नहीं, वे खाते क्या हैं और क्या वे योग करते हैं.

इन सभी बातों को ध्यान में रखने के बाद रिसर्चर इस नतीजे पर पहुंचे कि हर रोज 2000 कदम ज्यादा चलने से दिल की बीमारी का खतरा 10 फीसदी कम हो जाता है.

इसके अलावा स्ट्रोक और दिल के दौरे जैसी दूसरी बीमारियों का खतरा भी करीब आठ फीसदी घट जाता है. येट्स का कहना है, "ये नतीजे शारीरिक अभ्यास को लेकर अब तक के अध्ययनों से अलग है." उनका कहना है कि दिल की बीमारी और डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को इससे काफी फायदा पहुंच सकता है.

अगर सिर्फ 2000 कदमों का ही सवाल है, तो फिर देर किस बात की.

एजेए/एमजे (रॉयटर्स)

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