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विज्ञान

पेट में पनडुब्बी बतायेगी पेट की बीमारी

वह दवा की गोली जैसा एक कैप्सूल है. केवल दो सेंटीमीटर बड़ा है. निगलने पर पनडुब्बी की तरह हमारे पेट में तैरता है. डॉक्टर को दिखाता और बताता है कि पेट और आंतों में कहां क्या गड़बड़ी है.

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शरीर के भीतरी अंगों, विशेषकर पेट की बीमारियों का पता लगाने के लिए डॉक्टर को कई बार शरीर के भीतर झांकना पड़ता है. इसे एंडोस्कोपी यानी अंतःदर्शन कहते हैं. इसके लिए या तो पेट में एक छोटा-सा छेद करके या मुंह के रास्ते पेट में ऐसा कोई उपकरण उतारना पड़ता है, जिस के साथ कैमरा और रोशनी के लिए बत्ती भी लगी हो. रोगी के लिए यह सब इस बीच बहुत कष्टदायक तो नहीं रहा, पर सुखदायक भी नहीं कहा जा सकता.

जर्मनी में ट्यूबिंगन की एक कंपनी ने एक यूरोपीय परियोजना के तहत एक ऐसा छोटा सा कैप्सूल बनाया है, जिसे सीधे-सीधे निगला जा सकता है. उसमें एक सूक्ष्म कैमरा भी लगा हुआ है और रोशनी के लिए बत्ती की भी सुविधा है. डॉक्टर उसे पेट के ऊपर रखे एक चुंबक की सहायता पेट के भीतर घुमता-फिराता है.

इस परियोजना से जुड़े इंजीनियर डॉ. सेबास्टियान शोस्तेक ने उसे जानवरों के पेट में आजमा कर देखा है. कहते हैं, "किसी अंग को हर तरफ से देखने के लिए इस रोबोट जैसे कैप्सूल को ऊपर-नीचे, आगे-पीछे, यानी हर तरफ घुमाया फिराया जा सकता है. डॉक्टर इस सब के लिए आवश्यक निर्देश प्ले-स्टेशन जैसे एक निंयत्रण उपकरण के द्वारा देता है. कैप्सूल के ज़रिये वह हर चीज़ को देखता है और महसूस करता है, मानो वह वह ख़ुद एक पनडुब्बी में बैठा है और कैप्सूलनुमा इस पनडुब्बी को मनचाहे ढंग से चला रहा है."

दवा के कैप्सूल के समान

कैप्सूल-एन्डोस्कोपी शरीर के अंतःदर्शन की एक नयी तकनीकी शाखा है. क़रीब दस वर्षों से गोलीनुमा ऐसे सूक्ष्म कैमरे उपलब्ध हैं, जिन्हें रोगी को निगलना होता है और वे रोगी के पाचनतंत्र का भीतरी परिदृश्य दिखाते हैं. यह विधि पारंपरिक एंडोस्कोपी से आसान तो है, लेकिन इसमें कमी यह है कि कैमरा पूरी तरह शरीर की पाचनक्रिया की गतियों और गतिविधियों पर निर्भर होता है. डॉक्टर अपनी तरफ़ से कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता, किसी संदिग्ध जगह पर कैमरे को रोक कर उस जगह की लक्ष्यबद्ध जांच पड़ताल नहीं कर सकता.

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आसानी से पी सकते हैं कैप्सूल

चुंबक नियंत्रित

चुंबक नियंत्रित नये कैप्सूल का फ़ायदा यह है कि डॉक्टर पेट के पास चुंबक रख कर कैप्सूल को आंतों में अपनी इच्छानुसार हर तरफ घुमा-फिरा सकता है. किसी ख़ास जगह पर, जैसे कि आंतों में पैदा हो जाने वाले मस्सेनुमा पॉलिप के पास उसे रोक कर पॉलिप को अच्छी तरह देख सकता है. जठर या आमाशय में, जहां पाचकरसों की मात्रा सबसे अधिक होती है, इस कैप्सूल का एक ऐसा संस्करण इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसे चलाने के लिए पनडुब्बी की तरह का उस में एक नन्हा सा प्रॉपेलर (प्रणोदक) भी लगा होता है.

कैप्सूल के केवल एक सेंटीमीटर बड़े पारदर्शी अग्रभाग में कैमरे और सूक्ष्म बत्तियों वाली इलेक्ट्रॉनिक चिपें हैं. बत्तियों के अलग-अलग रंगों के प्रकाश में लिये गये चित्रों की तुलना करने पर आंत की अलग-अलग बीमारियों को पहचाना जा सकता है. सर्जरी के प्रोफ़ेसर डॉ. मार्क शुर अलग अलग रंगों का लाभ बताते हुए कहते हैं, " स्पेक्रट्रोस्कोपिक (वर्णक्रमी) विश्लेषण से हम तय कर सकते हैं कि हमें दिखायी पड़ रहा टिश्यू (ऊतक) बीमारी के कारण बदल गया है या उस में केवल जलन है, वह कोई पॉलिप है या कोई ख़तरनाक गाँठ है."

दवा के कैप्सूल से थोड़ा बड़ा

एंडोस्कोपी कैप्सूल की एक ही बड़ी कमी है कि डॉक्टर कुछ देखते ही उसे तुरंत काट कर हटा नहीं सकता, जैसा इस समय की प्रचलित विधियों में कई बार संभव है. इंजीनियर सेबास्टियान शोस्तेक यह भी मानते हैं कि यह कैप्सूल दवाओं वाले सामान्य कैप्सूलों से कहीं बड़ा है, लेकिन कहते हैं, "कैप्सूल कुछ बड़ा ज़रूर है और मुंह में भी ज़रा बड़ा महसूस होता है, पर उसे काफ़ी कुछ आराम के साथ निगला जा सकता है. थोड़ी हिचक तो होती है, पर निगलने में कोई समस्या नहीं होती."

2010 के अंत तक इस कैप्सूल के साथ क्लिनिकल टेस्ट शुरू होने वाले हैं.

रिपोर्ट: राम यादव

संपादन: महेश झा

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