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विज्ञान

पेट के कैंसर में मददगार हो सकता है बोटॉक्स

बहुत से मशहूर लोग अपने चेहरे से झुर्रियां हटाने के लिए बोटॉक्स का सहारा ले चुके हैं. शोधकर्ताओं का कहना है कि बोटॉक्स का इंजेक्शन पेट में बढ़ने वाले ट्यूमर को कम से कम अस्थायी रूप से रोक सकता है.

विज्ञान पत्रिका साइंस ट्रांजिशनल मेडिसिन में छपे शोध के मुताबिक शोधकर्ताओं ने पेट के कैंसर वाले चूहे पर अध्ययन किया. शोधकर्ताओं ने पाया कि बोटॉक्स वेगस तंत्रिका के सिग्नल को ब्लॉक कर देता है. यह तंत्रिका ब्रेन स्टेम से लेकर पेट तक जाती है. जिस तरह से ऑपरेशन ट्यूमर के विकास को धीमा करता है उसी तरह से बोटॉक्स भी कैंसर के विकास को कम करने में काम करता है.

शोध के सहलेखक और नॉर्वे में विज्ञान और तकनीक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डुआन चेन कहते हैं, "हमने पाया कि तंत्रिका के प्रभाव को दूर करने से कैंसर ट्यूमर में मूल कोशिकाओं को दबाया जा सकता है. जिससे कैंसर का इलाज और रोकथाम हो सकता है." वेगस तंत्रिका के पास बोटॉक्स का इंजेक्शन दिए जाने से वह अपना काम दिखाने लगा, उसने तंत्रिका संचारक और अहसेटिलकोलीन को बाधित किया जो ट्यूमर को बढ़ावा देते हैं. वेगस तंत्रिका को काट देने और विकास को बाधित करने वाली दवा से भी ट्यूमर धीमी गति से बढ़ता है.

इंसानों पर ट्रायल

शोध के मकसद के बारे में अध्ययन में शामिल एक और प्रोफेसर टिमोथी वॉन्ग बताते हैं, "वैज्ञानिकों ने लंबे अर्से से देखा है कि इंसान और चूहों के कैंसरों में ट्यूमर कोशिकाओं में और उसके आसपास बहुत सारी तंत्रिकाएं होती हैं. पेट के कैंसर पर ध्यान केंद्रित करते हुए हम कैंसर की शुरुआत और उसके विकास में तंत्रिका की भूमिका के बारे में और अधिक समझना चाहते थे."

नॉर्व में पेट के कैंसर के मरीजों पर इस पद्धति के साथ क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक कैंसर का इलाज नहीं है. जिन मरीजों के पेट के कैंसर का ऑपरेशन नहीं हो सकता है या फिर जिन मरीजों में कीमोथेरेपी का कोई असर नहीं हो रहा है, तकनीक उन्हें थोड़े और दिन जिंदा रख सकती है.

चेन कहते हैं, "हमारा मानना है कि यह एक बेहतर इलाज है क्योंकि इसका इस्तेमाल स्थानीय तौर किया जा सकता है और यह कैंसर की मूल कोशिकाओं को निशाना बनाता है." यह तकनीक दूसरे प्रकार के कैंसरों पर काम कर पाती है इसे निर्धारित करने के लिए आगे और शोध की जरूरत होगी. दुनिया भर में पेट का कैंसर चौथा आम प्रकार का कैंसर है. पेट के कैंसर की पहचान होने के पांच साल से ज्यादा तक एक चौथाई ही मरीज बच पाते हैं.

एए/एमजे (एएफपी)

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