पेगिडा प्रदर्शन और बढ़ता विरोध | दुनिया | DW | 23.12.2014
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दुनिया

पेगिडा प्रदर्शन और बढ़ता विरोध

जर्मनी के कई शहरों में इस्लाम विरोधी पेगिडा आंदोलन के समर्थकों और विरोधियों का प्रदर्शन हुआ है. कारोबार पर निर्भर देश में राजनीतिक दलों और उद्यमियों के बीच इस पर बहस हो रही है कि पेगिडा की दलीलों से कैसे निपटा जाए.

पेगिडा का मतलब है पश्चिम के इस्लामीकरण के खिलाफ यूरोप के राष्ट्रवादी. उसके प्रदर्शन का केंद्र पूर्वी जर्मनी का ड्रेसडेन है जहां पिछले हफ्तों में हजारों लोगों ने उसकी रैलियों में हिस्सा लिया है. संगठन ने सोमवार को 30,000 लोगों को इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा था. हालांकि उससे कम लोग आए लेकिन फिर प्रदर्शनकारियों का रिकॉर्ड बना. रैली में भाग लेने वालों की बढ़ती तादाद के बीच विरोध के स्वर भी बढ़ रहे हैं.

प्रदर्शन विशेषज्ञों का मानना है कि पेगिडा का एक हिस्सा उग्र दक्षिणपंथी विचारधारा का है. प्रदर्शन के आयोजनस्थल सेम्पर ऑपेरा के कर्मचारियों ने भी रैली के विरोध में बैनर लगाकर इस्लाम विरोधियों की कार्रवाई का विरोध किया. बैनरों पर लिखा था आंखे खोलो, दिल खोलो, दरवाजे खोलो और इंसान की मर्यादा अलंघनीय है. यह सावल भी पूछा जा रहा है कि आखिर ड्रेसडेन ही क्यों?

राजनीतिक दल पेगिडा के बढ़ते समर्थन से निपटने की नीति पर बहस कर रहे हैं तो उद्योग संघों ने रैलियों का विरोध करना शुरू कर दिया है. इस्लाम विरोधी आंदोलन की कड़ी निंदा करते हुए जर्मन उद्योग महासंघ के प्रमुख उलरिष ग्रिलो ने कहा कि पेगिडा का उत्थान देश के हितों और उसके मूल्यों को नुकसान पहुंचा रहा है. उन्होंने कहा कि यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए और ज्यादा विदेशियों की जरूरत है. उन्होंने कहा, "धनी देश होने के नाते और ईसाई प्रेमभाव के कारण हमारे देश को ज्यादा शरणार्थियों को स्वीकार करना चाहिए."

ग्रिलो का संगठन जर्मनी के 100,000 उद्यमों का प्रतिनिधित्व करता है जहां 80 लाख लोग काम करते हैं. उन्होंने कहा कि पेगिडा इस्लामी आतंकवाद के डर का समूचे धर्म को बदनाम करने में दुरुपयोग कर रहा है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता. ग्रिलो ने देश की बूढ़ी होती आबादी के मद्देनजर प्रशिक्षित विदेशियों को विकास और समृद्धि की गारंटी बताया.

जर्मनी की विदेश मामलों की कमिश्नर आयदान ओयसोगुस ने कहा कि सराकर पेगिडा के कमजोर होने का इंतजार नहीं कर सकती, "हमें लोगों को शिक्षित करने का ज्यादा प्रयास करना होगा. इसमें ज्यादा समय लगता है लेकिन उसका दूरगामी प्रभाव होता है." जर्मन राजनीतिज्ञों में पेगिडा से निबटने पर मतभेद सामने आ रहे हैं. वामपंथी नेता और थ्युरिंजिया प्रांत के मुख्यमंत्री बोडो रामेलोव ने पेगिडा के नेताओं से बातचीत करने से मना किया है, लेकिन प्रदर्शनकारियों से बातचीत का समर्थन किया है.

ग्रीन पार्टी के नेता चेम ओएजदेमीर ने भी बातचीत की मांग ठुकरा दी तो पूर्व चांसलर गेरहार्ड श्रोएडर ने आंदोलन का खुला विरोध करने की मांग की है.

सत्ताधारी गठबंधन की सीएसयू पार्टी के गेर्ड मुलर ने कहा कि अलग थलग करने की नीति मददगार नहीं होगी, इससे आंदोलन और बढ़ेगा. चांसलर अंगेला मैर्केल की सीडीयू पार्टी के संसदीय दल के नेता फोल्कर काउडर ने कहा है कि जर्मनी में इस्लामीकरण का खतरा नहीं है लेकिन उन्होंने कहा कि यदि विदेशी नागरिकों को पार्टियों के साथ नहीं जोड़ा गया तो इस्लामी पार्टी बनने का खतरा है.

पेगिडा आंदोलन के बढ़ने के साथ सामाजिक सहिष्णुता के भी घटने का खतरा है. एक ओर समाज में एकजुटता घटने की शिकायत हो रही है

तो दूसरी ओर ऐसे ऐप सामने आ रहे हैं जिनकी मदद से जाना जा सकेगा कि कौन सा दोस्त पेगिडा का समर्थन कर रहा है.

यह आंदोलन ऐसे समय में उभर रहा है जब जर्मनी ने दूसरे यूरोपीय देशों की तुलना में बेहतर आर्थिक प्रदर्शन किया है और आर्थिक मुश्किलों से बच गया है, लेकिन दूसरे देशों से आने वाले शरणार्थियों की तादाद में तेजी आई है.

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