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दुनिया

पेंशन के चक्कर में ठप्प पड़ा फ्रांस

फ्रांस में रिटायरमेंट की उम्र बढाने के विरोध में आज वहां की यूनियन फिर हड़ताल पर हैं और विरोध प्रदर्शन कर रही हैं. महीने भर में दूसरी बार ये 24 घंटे की हड़ताल बुलाई गई है. आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका.

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फ्रांस के राष्ट्रपति निकोला सारकोजी द्वारा रिटायरमेंट की उम्र 60 से 62 करने की योजना के विरोध में यह प्रदर्शन किए जा रहे हैं. दो हफ्ते पहले भी फ्रांस की सड़कों पर ऐसा ही प्रदर्शन देखा गया और इस बार यूनियन उम्मीद कर रही हैं कि वे और भी ज्यादा लोगों को सड़कों पर उतारने में सफल रहेंगी.

सारकोजी पहले से ही रोमा जिप्सियों को देश से निकालने के कारण चर्चा में है. पिछले दिनों यूरोपीय संघ ने भी इसकी निंदा की थी. साथ ही एक वित्तीय घोटाले के चलते भी हाल ही में मीडिया उन पर काफी बरसी है. और अब उन्हें फ्रांस के नागरिकों के उग्र विरोध का सामना करना पड़ रहा है. लेकिन इस सब के बाद भी सारकोजी का कहना है कि वो अपनी निर्णय पर अड़े रहेंगे.

लेकिन फ्रांस में संसद के निचले सदन ने पेंशन रिफॉर्म पहले ही पारित कर दिया है और 5 अक्टूबर से संसद के ऊपरी सदन में इस पर बहस होनी है. माना जा रहा है कि वहां भी यह आसानी से पारित कर दिया जाएगा.

इस प्रदर्शन से स्कूलों और आम यातायात पर भारी असर पड़ेगा. हालांकि उम्मीद जताई जा रही है कि यूरोपीय देशों में चलने वाली यूरोरेल सेवा पर इसका कोई असर नहीं होगा. ट्रेनों की आवाजाही में कल बुधवार से कमी देखी जा रही है और बताया जा रहा है कि इसमें शुक्रवार तक कोई सुधार नहीं होगा. शाल दे गल सहित फ्रांस के दो हवाई अड्डों पर 40 प्रतिशत उड़ानें रद्द कर दी गई हैं.

एक तरफ लोगों में इस पेंशन रिफॉर्म को लेकर गुस्सा है तो वहीं सरकार का तर्क है कि इस से 2030 तक 70 अरब यूरो बचाए जा सकते हैं. इस समय फ्रांस का सकल घरेलू उत्पाद लगभग आठ प्रतिशत के घाटे में है. यह यूरोपीय संघ द्वारा तय की गई तीन प्रतिशत की सीमा से बहुत ऊपर है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ईशा भाटिया

संपादनः आभा एम

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