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दुनिया

पूर्व राष्ट्रपति वुल्फ बरी

जर्मनी के पूर्व राष्ट्रपति वुल्फ को अदालत ने भ्रष्टाचार के एक मामले में बरी कर दिया है. वुल्फ पर राष्ट्रपति रहते हुए पद के दुरुपयोग का आरोप लगा था. 750 यूरो के अहसान को चुकाने के चक्कर में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था.

जर्मनी में भ्रष्टाचार संबंधी कानून बेहद कड़े हैं. जर्मनी के इतिहास में पहली बार एक पूर्व राष्ट्रपति पर मुकदमा चलाया गया. पूर्व राष्ट्रपति क्रिस्टियान वुल्फ पर आरोप थे कि उन्होंने म्यूनिख के अक्टूबर फेस्ट में रहने का खर्च अपने दोस्त से लिया. रहने और खाने का खर्च करीब 754 यूरो था. वुल्फ के दोस्त ने इस बिल को अदा किया था और वुल्फ ने इस अहसान को चुकाने के लिए उनकी फिल्म के प्रमोशन के लिए चिट्ठी लिखी थी. कभी जर्मनी के भावी चांसलर के रूप में देखे जाने वाले वुल्फ को ये आरोप सामने आने के बाद 2012 में पद से इस्तीफा देना पड़ा था. हनोवर की एक अदालत के जज फ्रांक रोजेनो ने कहा, "आरोपी वुल्फ पर दोष सिद्ध नहीं हुए."

इस फैसले के साथ ही जर्मनी के सबसे हाई प्रोफाइल राजनीतिक और कानूनी मामले का अंत हो गया. जर्मनी के युवा राष्ट्रपति रहे 54 वर्षीय वुल्फ ने पिछले साल 20,000 यूरो जुर्माना देकर अदालत में पेश होने से बचने का प्रस्ताव ठुकरा दिया था. वुल्फ चाहते थे कि वे आरोपों से बेदाग होकर बाहर निकले और अपने सम्मान को वापस पाएं. हालांकि वुल्फ के लिए यह रकम बड़ी नहीं थी. पूर्व राष्ट्रपति होने के नाते उन्हें सालाना दो लाख यूरो की पेंशन मिलती है.

Verfahren Prozess Christian Wulff

वुल्फ ने 2010 में पद से इस्तीफा दिया था

विवाद की जड़

वुल्फ राष्ट्रपति पद पर सिर्फ 20 महीने ही रह पाए थे. जर्मन राष्ट्रपति के पास सीमित शक्तियां होती हैं लेकिन उनसे उम्मीद की जाती हैं कि वे देश के नैतिक कम्पास के रूप में काम करें. साथ ही आचरण के तौर पर भी खुद को उच्चतम मानकों पर रखें. साल 2008 में जब म्यूनिख के अक्टूबर फेस्ट वुल्फ गए थे, तो तब उनके रहने और खाने का खर्च उनके दोस्त ने उठाया था. उस वक्त वुल्फ लोअर सैक्सनी प्रांत के मुख्यमंत्री थे.

वुल्फ ने सीमेंस कंपनी के तत्कालीन प्रमुख पेटर लोशर को चिट्ठी लिखी और ग्रोनेवोल्ड की नई फिल्म को प्रायोजित करने के लिए कुछ पैसे मांगे. लोशर ने पैसे देने से इनकार कर दिया. पूर्व राष्ट्रपति ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने फिल्म को इसलिए बढ़ावा दिया क्योंकि उन्हें फिल्म की कहानी पर यकीन था.

इसके बाद वुल्फ 2010 में जर्मनी के राष्ट्रपति बने. राष्ट्रपति के तौर पर वुल्फ की विश्वसनीयता तब खत्म हो गई जब जर्मन मीडिया ने उन पर उद्यमी दोस्त से कर्ज लेने के आरोप लगाए. वुल्फ को लेकर मीडिया में तीखी बहस छिड़ गई. मीडिया में ऐसी खबरें आईं कि वुल्फ ने इस कर्ज के बारे में लोवर सैक्सनी की विधानसभा को भ्रम में रखा. साल 2010 में राष्ट्रपति होर्स्ट कोएलर के अफगानिस्तान पर दिए विवादित बयान के बाद चासंलर अंगेला मैर्केल ने वुल्फ को जर्मनी के राष्ट्रपति के तौर पर चुना था.

एए/ओएसजे (एएफपी,डीपीए, रॉयटर्स)

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