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दुनिया

पूर्वी यूक्रेन में 'जनमत संग्रह'

पूर्वी यूक्रेन में डोनेट्स्क और लुहांस्क में 'पीपुल्स रिपब्लिक' बनाने के लिए जनमत संग्रह किया जा रहा है. रूस समर्थक अलगाववादी यूक्रेन से अलग होने और खुद का शासन स्थापित करने के लिए ये मतदान करवा रहे हैं.

यूक्रेन के राष्ट्रपति ओलेक्सांडर तुर्चिनोव ने चेतावनी देते हुए कहा है कि जनमत संग्रह में अलग होने के लिए"हां"पर निशान लगाने से देश खत्म हो जाएगा. उन्होंने लोगों से अपील की है कि वो जनमत संग्रह में "नहीं" को चुने. अगर ऐसा नहीं हुआ तो देश दो हिस्सों में बंट जाएगा.

इस विवादास्पद और अफरातफरी में हो रहे 'तथाकथित' जनमत संग्रह में डोनेट्स्क और लुहांस्क में रुस समर्थक लड़ाकों ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वह इन दो इलाकों को पीपुल्स रिपब्लिक बनाने के लिए वोट दें.

पश्चिमी देशों और कीव की सरकार ने इस जनमत संग्रह को गैर कानूनी बताया है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मत देने वाले लोगों के पासपोर्ट की जानकारी तो ली जा रही है लेकिन उन्होंने मत दिया, इसका कोई निशान उनके हाथ पर या पासपोर्ट पर नहीं लगाया जा रहा है. इससे यह आशंका पैदा हो रही है कि लोग अलग अलग मतदान केंद्रों पर जाकर कई बार वोट भी कर सकते हैं.

"गर्त में"

तुर्चिनोव ने कहा है कि कीव से अलग होने का कदम इन इलाकों को "गर्त में" पहुंचा देगा. उन्होंने कहा, "जो खुद के शासन की बात कर रहे हैं वो समझते नहीं हैं कि इससे उनकी अर्थव्यवस्था का पूरी तरह विनाश हो जाएगा. सामाजिक सुरक्षा सेवाएं और इलाके की अधिकतर जनसंख्या के लिए जीवन मुश्किल हो जाएगा."

महीनों से कीव अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, अमेरिका और यूरोपीय संघ ने मिलकर प्रतिबद्धता जताई है कि यूक्रेन को आर्थिक संकट से बाहर निकाला जाएगा. आईएमएफ ने उसके लिए 17 अरब डॉलर का बेलआउट भी घोषित किया है.

मॉस्को का असर

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने यह भी चेतावनी दी है कि स्थानीय लोग ऐसे आतंकियों पर भरोसा कर रहे हैं जो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हित में काम कर रहे हैं.

अमेरिका सहित अन्य पश्चिमी देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को बताया कि मॉस्को ने ही ये अलगाववादी अभियान चलाया है.

अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उनका देश इस गैर कानूनी जनमत संग्रह को मान्यता नहीं देगा. मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि वोटिंग और विभाजन से अव्यवस्था फैलाने की कोशिश की जा रही है.

इस बीच शुक्रवार को रूस का समर्थन कर रहे अलगाववादियों और यूक्रेनी सैनिकों के बीच स्थानीय सरकार पर नियंत्रण के लिए हिंसक झड़पें हुईं. मारियूपोल में सात लोग मारे गए और 20 अलगाववादियों सहित करीब 40 लोग घायल हुए.

अभी यह भी साफ नहीं है कि 25 मई को तय चुनाव यूक्रेन में होंगे या नहीं. जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल और फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद ने शनिवार को साझा बयान में चेतावनी दी है कि अगर तय चुनाव नहीं होते तो रूस पर और प्रतिबंध लगाए जाएंगे.

एएम/एमजी (डीपीए, एएफपी, रॉयटर्स)