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दुनिया

'पूरी तरह प्रशिक्षित आतंकवादी है फारूक'

वॉशिंगटन में मेट्रो में बम धमाके की साजिश के सिलसिले में जिस व्यक्ति को पकड़ा गया उसे दरअसल अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के खिलाफ युद्ध का प्रशिक्षण दिया गया था. एबीआई की जांच में परतें खुलीं.

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34 साल के फारूक अहमद को बुधवार को एक स्टिंग ऑपरेशन के तहत गिरफ्तार किया गया. उसने अंडरकवर एजेंट्स से कहा कि उसने बंदूक चलाना और सीधी लड़ाई सीखी. उसका आखिरी लक्ष्य अफगानिस्तान में जा कर लड़ाई करना है. एफबीआई के हलफनामे में कहा गया है कि वह जनवरी में पाकिस्तान, अफगानिस्तान की यात्रा करने वाला था. एफबीआई एजेंट चार्ल्स डेयुब ने कहा, "अहमद उसकी बंदूकों को ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल कर रहा है क्योंकि उसका अंतिम लक्ष्य अफगानिस्तान जाकर अमेरिकी सेना से लड़ना है और उन्हें मारना है."

एफबीआई मानती है कि अहमद पहले तो सऊदी अरब हज यात्रा पर अगले महीने जाने की तैयारी में था और उसके बाद वह अफगानिस्तान जा कर शहीद होना चाहता था.

एफबीआई ने हलफनामे की विषय वस्तु के बारे में टिप्पणी देने से इनकार कर दिया. अधिकारियों ने जोर देकर कहा है कि इस स्टिंग ऑपरेशन से आम जनता को किसी तरह का खतरा नहीं था क्योंकि संदिग्ध पर बहुत नजदीक से नजर रखी जा रही थी.

Kama Ado, Afghanistan

अहमद की गिरफ्तारी ऐसे समय पर हुई है जब यूरोप और अमेरिका में आतंकी हमलों की चेतावनी जारी की दई है. अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अल कायदा अमेरिकी नागरिकों को हमलों के लिए तैयार कर रहा है. अधिकारियों ने कहा है कि यह हमले छोटे होंगे लेकिन इन्हें नाकाम कर पाना मुश्किल होगा.

फारूक अहमद 1993 में अमेरिका पहुंचा और वह वर्जीनिया के एशबर्न में रह रहा था. उस पर आरोप हैं कि उसने आतंकी गुट को हमले करने के लिए जानकारी इकट्ठा करने और हमले की साजिश रचने में मदद की.

एफबीआई के हलफनामे में अहमद को रेलवे स्टेशनों पर एक व्यक्ति के साथ देखा गया. यह सहयोगी उस समय भी फारूक से साथ था जब उसने अल कायदा से संपर्क करने की कोशिश की. एफबीआई ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है साथ ही ऐसा भी कोई संकेत नहीं है कि किसी दूसरे संदिग्ध की मामले में तलाश की जा रही हो.

हलफनामे में कहा गया कि फारूक ने अंडरकवर एजेंट से कहा कि उसने राइफल, शॉटगन चलाने की प्रैक्टिस की, मार्शल आर्ट सीखा साथ ही इसकी भी ट्रेनिंग की चाकू कैसे चलाया जाए और दुश्मन हथियार कैसे छीन लिए जाएं.

मई 2008 और फरवरी 2009में उसने बंदूकें खरीदने की कोशिश की. साथ ही एफबीआई के शपथपत्र के मुताबिक, "उसने अल कायदा के लिए बंदूकें खरीदने की कोशिश की, गुट के सदस्यों को ट्रेनिंग में सहायता की और इस्लामिक चरमपंथी नेटवर्क के लिए 10 हजार डॉलर दिए. अहमद ने कहा कि वह ज्यादा से ज्यादा सैनिकों को मारना चाहता."

रिपोर्टः एजेंसियां/आभा एम

संपादनः ओ सिंह

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