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दुनिया

पूरब की यात्रा पर मनमोहन

यूरोप और अमेरिका के साथ संबंधों के साथ साथ पूर्वी एशिया के देशों को वरीयता देने की भारत की नई नीति के तहत प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह वियतनाम, जापान और मलेशिया की यात्रा पर जाएंगे.

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हालांकि विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार के लिए बातचीत की जाने वाली है, भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा मुख्यतः व्यापारिक संबंधों को सुदृढ़ बनाने पर केंद्रित रहेगी. मोटे तौर पर इस क्षेत्र के देश विश्वव्यापी आर्थिक संकट को झेलने में काफी हद तक कामयाब रहे हैं, भारत के बारे में भी यह बात कही जा रही है, हालांकि जापान के बारे में ऐसा नहीं कहा जा सकता है. इस उभरते आर्थिक क्षेत्र में आपसी संबंधों को बढ़ावा देना भारतीय प्रधानमंत्री का मुख्य उद्देश्य रहेगा.

जापान और मलेशिया की यात्राएं द्विपक्षीय संबंधों के तहत की जा रही हैं, जबकि वियतनाम में भारतीय प्रधानमंत्री आसियान भारत शिखर भेंट में भी भाग लेंगे.

माना जा रहा है कि जापान के प्रधान मंत्री नाओतो कान के साथ बातचीत में व्यापारिक संबंधों के विस्तार के अलावा असैनिक परमाणु क्षेत्र में सहयोग पर भी बल दिया जाएगा. इस यात्रा का एक राजनीतिक पक्ष भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. दोनों देश सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य बनने के इच्छुक है. इसकी रोशनी में संयुक्त राष्ट्र की संरचना में सुधार का सवाल भी दोनों नेताओं की बातचीत में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा. दोनों देश जी-4 की भूमिका को मजबूत बनाना चाहते हैं. इस ग्रुप में भारत और जापान के अलावा जर्मनी और ब्राजील शामिल हैं.

भारतीय प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान भारत और जापान के बीच आर्थिक साझेदारी का एक समझौता संपन्न किया जाने वाला है. इसके तहत पिछले वर्ष के 12 अरब डॉलर के बराबर द्विपक्षीय व्यापार को दस गुना करने की योजना है.

वियतनाम की राजधानी हनोई में भारतीय प्रधानमंत्री आसियान भारत शिखर भेंट में भाग लेंगे, जिसमें भारत के साथ पूर्वी एशियाई क्षेत्र को बेहतर ढंग से जोड़ने के उपायों पर विचार किया जाएगा. भारत इसकी खातिर एक क्षेत्रीय वित्तीय संरचना तैयार करने में दिलचस्पी दिखा रहा है. इस सिलसिले में एक मेकोंग भारत गलियारे के निर्माण की बात की जा रही है.

पिछले महीने भारतीय राजनयिकों को संबोधित करते हुए प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि भारत की विदेश नीति पूर्वी और दक्षिण पूर्वी एशिया की ओर केंद्रित होनी चाहिए. आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार 21 वीं सदी में इस क्षेत्र में निरंतर आर्थिक वृद्धि देखी जाएगी.

रिपोर्ट: पीटीआई/उभ

संपादन: महेश झा

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