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ताना बाना

पुलिसकर्मियों की रिहाई, पर पुष्टि नहीं

बिहार में माओवादियों की कैद में मौजूद तीन पुलिसकर्मियों की रिहाई पर रहस्य बना हुआ है. माओवादियों का दावा है कि लोगों की अपील पर उन्होंने पुलिस वालों को रिहा कर दिया है लेकिन अभी इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है.

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अभय यादव का परिवार

मुंगेर, जमुई, लखीसराय, बंका और कैमूर जिलों में नक्सल विरोधी मुहिम पर निगरानी रखने वाले डीजीपी नीलमणि और आईजी (ऑपरेशन) केएस द्विवेदी ने कहा, "हम इन खबरों की जांच पड़ताल कर रहे हैं कि माओवादियों ने रविवार सुबह बंधकों को रिहा कर दिया है. लेकिन माओवादियों की तरफ से बंधकों को रिहा करने की कोई आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है. हमने इन जिलों के एसपी सर्तक कर दिए गए हैं. लेकिन अभी कोई बंधक नहीं मिला है."

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है पुलिसकर्मियों को रिहा किए जाने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है.

उधर एक स्थानीय टीवी चैनल पर प्रसारित फुटेज में खुद को किशनजी बताने वाले एक माओवादी नेता को बंधक बनाए गए एक पुलिसकर्मी अभय प्रसाद यादव के परिवार वालों से मिलते हुए दिखाया गया है. साथ ही फुटेज में माओवादी नेता कह रहे हैं कि अभय जल्द ही घर लौटेंगे.

हफ्ते भर से चल रहा बंधक कांड रविवार को खत्म हो जाने की उम्मीद है क्योंकि एक माओवादी नेता ने शनिवार रात कहा कि वह सुबह आठ बजे तक बंधकों को रिहा कर देंगे. माओवादियों ने चार पुलिसकर्मियों को बंधक बनाया जिसमें से एक लुकास टेटे की उन्होंने हत्या कर दी.

एक स्थानीय टीवी चैनल ने जमुई में नक्सली सूत्रों का हवाला देते हुए कहा है कि पुलिसकर्मियों को जमुई और बंका जिले की सीमा के पास बेलहार के जंगलों में छोड़ा गया है.

बिहार में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं. इसलिए भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर इस बंधक संकट को हल करने का दबाव था. शनिवार को उन्होंने कहा कि अगर माओवादी बातचीत को राजी हों तो उन्हें सुरक्षित रास्ता दिया जा सकता है. खुद को माओवादियों का प्रवक्ता बताने वाले अविनाश ने दावा किया कि उनकी केंद्रीय समिति ने बातचीत के लिए मुख्यमंत्री के प्रस्ताव को खारिज करते हुए तीनों पुलिसकर्मियों को रिहा करने का फैसला किया है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः वी कुमार

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