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दुनिया

पुराने नोट जमा कराने का एक और मौका मिले: सुप्रीम कोर्ट

जिन लोगों के पास 500 और 1000 के पुराने नोट हैं और नोटबंदी के दौरान इन्हें जमा नहीं करा पाने का कोई उचित कारण है उन्हें इसके लिए एक और मौका मिल सकता है.

भारत में पिछले साल की नोटबंदी के बाद जो लोग तय समय सीमा में किसी वाजिब कारण से पुराने नोट नहीं जमा कर सके उनके लिए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से रास्ता निकालने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने इस बारे में सरकार से दो हफ़्ते के भीतर हलफनामा दायर करने को कहा है. सुधा मिश्रा और कुछ दूसरे लोगों ने याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट से इस बारे में सरकार को निर्देश देने के लिए कहा था. सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैक और भारत सरकार से पूछा है कि जो लोग वाजिब कारणों से 500 और 1000 के नोट बैंक में जमा नहीं करा पाए क्या उनके लिए कोई तरीका निकाला जा सकता है.

सुनवाई के दौरान भारत सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसीटर जनरल रंजीत कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि सरकार ऐसे लोगों के पास मौजूद पुराने नोटों को जमा कराने के लिए रास्ता ढूंढ रही है. याचिका दायर करने वालों का कहना है कि नोट जमा ना करवा पाने के पीछे अलग अलग लोगों के पास अलग वजहें थीं. इनमें एक महिला बच्चे को जन्म देने के कारण ऐसा नहीं कर पाई. कुछ लोग ऐसे भी हैं जो उस दौरान जेल में बंद थे. 

बीते साल नवंबर में सरकार ने 500 और 1000 के नोट रातोंरात बंद कर दिए थे और इन्हें बैंक में जमा कराने के लिए मार्च के आखिर तक का समय दिया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी नोटबंदी को अपने सरकार की बड़ी उपलब्धि मानते हैं. इस दौरान उन्हें व्यापक जनसमर्थन भी हासिल हुआ. हालांकि विपक्षी दल इसे जनविरोधी कदम करार देते हैं. नोटबंदी के दौरान लोगों को नगदी जमा कराने और नए नोट बैंक से लेने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी थी. इसके अलावा नोट बदलने के नियमों में लगातार फेरबदल होते रहे इसकी वजह से लगातार उलझन बनी रही.

एनआर/एमजे (पीटीआई)

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