पुराने चर्म रोगों का इलाज | मंथन | DW | 04.02.2016
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मंथन

पुराने चर्म रोगों का इलाज

त्वचा की बीमारियों पर समय पर ध्यान ना दिया जाए तो वे अक्सर जीवन भर के लिए गले पड़ जाती हैं. लेकिन क्या आपने ठंडे प्लाज्मा की मदद से इलाज के बारे में सुना है? इससे मदद मिल सकती है.

त्वचा की बीमारी अक्सर सालों पीछा नहीं छोड़ती. खुले घावों में दर्द तो होता ही है, वे जल्दी ठीक भी नहीं होते. न्यूरोडर्मिटिस या सोरियासिस जैसी बीमारियां मरीज को खुजली से भी परेशान करती रहती हैं. कई बार तो अस्पताल में पाए जाने वाले आक्रामक बैक्टीरिया से ऐसा संक्रमण फैलता है जिसका इलाज भी मुश्किल है. जर्मन वैज्ञानिक त्वचा पर ऐसे संक्रमणों पर ठंडे प्लाज्मा से इलाज को कारगर बता रहे हैं.

क्या करता है प्लाज्मा

जर्मनी के फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट आईएसटी गोएटिंगन ने घाव और चर्मरोगों पर कोल्ड प्लाज्मा के असर और उसकी सुरक्षा का टेस्ट किया है. कोल्ड प्लाज्मा माइक्रोऑर्गेनिज्मों को मार डालता है और त्वचा में रक्त संचालन को प्रेरित करता है. फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट के भौतिकशास्त्री डॉ. आंद्रेयास हेल्मके के मुताबिक प्लाज्मा बैक्टीरिया और माइक्रोऑर्गेनिज्म के खिलाफ काम करता है और बीमारी पैदा करने वाले इन कीटाणुओं को मार डालता है. बाहरी सतह के नीचे यह रक्त के माइक्रो प्रवाह को बढ़ावा देता है, इससे क्रोनिक घाव के इलाके में पौष्टिक तत्वों और ऑक्सीजन की सप्लाई बेहतर होती है और इस प्रभाव के कारण प्लाज्मा का घाव को ठीक करने वाला असर होता है.

डॉ. आंद्रेयास हेल्मके का कहना है कि प्लाज्मा इलेक्ट्रिक कंडक्टर वाली गैस है जिसके माध्यम से गैस में इलेक्ट्रिक ऊर्जा जाती है. इससे कई प्रतिक्रियाएं होती हैं. मसलन विद्युत आवेश के हिसाब से पार्टिकल अलग होते हैं, मॉलिक्यूल अणु में बदलते हैं, और नए कंपाउंड बन सकते हैं. और वे पार्टिकल, जिनमें ऊर्जा भेजी जाती है, उसे वे रेडिएशन के रूप में आगे दे सकते हैं.

फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट में बायोकेमिस्ट मोनिका गेलकर कहती हैं, "प्लाज्मा बैक्टीरिया और फंगस जैसे दूसरे माइक्रोऑर्गेनिज्म को मार सकता है. इसमें रिएक्टिव केमिकल कंपाउंड और इलेक्ट्रिक फील्ड साथ प्रतिक्रिया करते हैं और मेम्ब्रेन को नुकसान पहुंचाते हैं. इसके अलावा वह माइक्रोऑर्गेनिज्म के अंदर डीएनए और प्रोटीन को भी नष्ट करता है और इस तरह माइक्रोऑर्गेनिज्म को मार सकता है."

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मशीन से मदद

डॉक्टरों, बायोलॉजिस्टों और भौतिकशास्त्रियों ने मिलकर व्यवहार में आ सकने वाली एक मशीन भी बनाई है जो सीधे त्वचा पर कोल्ड प्लाज्मा बनाती है. एक क्लीनिकल स्टडी के जरिए इसके एंटी बैक्टीरिया वाले असर को प्रमाणित किया जा चुका है. हाई वोल्टेज इंपल्स सक्रिय करते ही त्वचा और मशीन के बीच की हवा कोल्ड प्लाज्मा में बदल जाती है. डॉ. आंद्रेयास हेल्मके बताते हैं, "यह प्लाज्मा चिकित्सा दरअसल इस समय लागू तीन क्लासिकल थेरेपी का मिश्रण है, ओजोन थेरेपी, सिमुलेशन करेंट थेरेपी और फोटो थेरेपी. यह मशीन यहां उसे प्लाज्मा तकनीक के साथ एक जगह एक ही समय में जोड़ देती है."

कोल्ड प्लाज्मा से क्रोनिक घावों का इलाज किया जा रहा है. चूंकि इस तरीके से त्वचा पर माइक्रोऑर्गेनिज्मों और खुजली को कम किया जा सकता है, वैज्ञानिकों को उम्मीद है इससे न्यूरोडर्मिटिस और सोरियासिस में भी कामयाबी मिल सकती है.

मार्टिन रीबे/एसएफ

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