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दुनिया

पीड़ित मजदूरों के लिए फंड

दुनिया की चार बड़ी रिटेल कंपनियों, निर्माताओं और मजदूर समूहों ने मिलकर तय किया है कि बांग्लादेश के राणा प्लाजा में हुई दुर्घटना के पीड़ितों को मुआवजा दिया जाएगा.

इसी साल अप्रैल में बांग्लादेश के राणा प्लाजा फैक्ट्री परिसर के ढह जाने से 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. आठ महीने की कोशिशों के बाद अब सभी पक्षों ने मिल कर ये तय किया है कि इस दुर्घटना के पीड़ितों, घायल मजदूरों और मरने वालों के परिवारों को हर्जाना देने के लिए 4 करोड़ डॉलर का एक फंड बनाया जाएगा. 1984 में भारत में हुई भोपाल गैस त्रासदी के बाद बांग्लादेश की ये दुर्घटना दुनिया भर में अब तक की सबसे बुरी औद्योगिक दुर्घटना है.

प्राइमार्क, एल कोर्टे इंग्ल्स, लॉबलो और बॉन मार्च कंपनियों ने सहायता राशि इकट्ठा करने का वादा किया है. अंतराष्ट्रीय श्रम संगन के लीजो सिब्बेल कहते हैं, "पीड़ितों तक मदद पहुंचाने के लिए बने फंड में अंतरराष्ट्रीय ब्रांड और रिटेलर्स स्वेच्छा से योगदान कर रहे हैं, जो किसी भी अंतरराष्ट्रीय दाता से योगदान लेने के लिए भी खुला है," सिब्बेल ने सभी पक्षों के बीच मुआवजे को लेकर सहमति बनाने में विशेष भूमिका निभाई है. इसी साल सितंबर में जिनेवा में कपड़ा ब्रांडों और हर्जाने के लिए दबाव बनाने वाले समूहों के बीच बातचीत असफल हो गई थी.

Bangladesch Tote bei Einsturz von Textilfabrik 24.04.2013

राणा प्लाजा फैक्ट्री परिसर दुर्घटना में गईं 1,000 से ज्यादा जानें

फैशन की महंगी कीमत

राणा प्लाजा ढाका के बाहरी इलाके में बना औद्योगिक परिसर था. वहां एक नौ मंजिला इमारत ढह गई थी जिसमें कामगार बड़े पश्चिमी ब्रांडों के लिए कपड़े की सिलाई का काम करते थे. इस घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान वहां की करीब 4,500 कपड़ा फैक्ट्रियों की बुरी हालत की ओर खींचा. सरकार ने राणा प्लाजा हादसे के बाद स्थिति को सुधारने का वादा किया था. इस दुर्घटना के बाद 100 से भी ज्यादा अमेरिकी और यूरोपीय रिटेल कंपनियों ने एक सुरक्षा समझौते पर दस्तखत भी किए थे. यह समझौता मजदूर संगठनों ने तैयार किया था जिसमें कामकाज के तौर तरीकों की ज्यादा निगरानी करने की बात है. लेकिन हर्जाने को लेकर लंबे समय से कोई सहमति नहीं बन पाई थी.

वैसे प्राईमार्क और बांग्लादेश सरकार से पीड़ित परिवारों को कुछ सहायता मुहैया कराई गई थी. अब समझौते के बाद प्राईमार्क ने इस नए फंड के लिए भी वित्तीय मदद दी है. स्पेन के एल कोर्टे इंग्ल्स, कनाडा की प्रमुख रिटेल चेन लॉबलो और ब्रिटेन के बॉन मार्च कंपनियों ने भी जल्दी ही राशि पहुंचाने का आश्वासन दिया है. लेकिन ये अभी साफ नहीं है कि कौन सी कंपनी कितना पैसा देंगी.

भरना पड़ा हर्जाना

उम्मीद की जा रही है कि राणा फैक्ट्री में अपने कपड़े बनवाने वाले कम से कम 29 ब्रांड तो इस फंड के लिए पैसे जरूर देंगे. बांग्लादेश में इंडस्ट्रीऑल के अध्यक्ष एके रॉय ने कहा, "कम से कम इतना तो वे उन लोगों और उनके परिवारों के लिए कर ही सकते हैं जिनका सब कुछ उनके लिए कपड़े बनाते बनाते खो गया." इंडस्ट्रीऑल उन मजदूर समूहों में से एक है जिन्होंने इस समझौते तक पहुंचने के लिए संघर्ष किया है. बांग्लादेश सरकार ने कहा है कि वो इस फंड में योगदान नहीं करेगी क्योंकि वो पहले ही इस दुर्घटना की चपेट में आए 777 पीड़ितों को 18 करोड़ टका (करीब 22.5 लाख डॉलर) की मदद पहुंचा चुकी है. श्रम सचिव मिकाइल शिपार कहती हैं, "हम बाकी पीड़ितों को भी जल्दी ही मुआवजा दे देंगे."

बांग्लादेश में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपड़ा उद्योग है. यहां हर साल 20 अरब डॉलर से भी ज्यादा का कारोबार होता है. बांग्लादेश के कुल निर्यात का 80 फीसदी हिस्सा इस क्षेत्र से आता है. यहां से ज्यादातर निर्यात अमेरिका और यूरोप के देशों में होता है. बांग्लादेश में कपड़ा फैक्ट्रियों में करीब 40 लाख लोग काम करते हैं जिनमें ज्यादातर महिलाएं हैं.

आरआर/ओएसजे (एएफपी)

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