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जर्मन चुनाव

पिल्लई नहीं पाक के पिटारे ने की गड़बड़ः भारत

भारत ने पाकिस्तान के इस दावे को खारिज किया है कि विदेश मंत्रियों की बातचीत के दौरान दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि मुंबई हमलों में आईएसआई की भूमिका के बारे में दिया गया गृह सचिव जी के पिल्लई का बयान गैरजरूरी था.

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विदेश मंत्रियों की मुलाकात से बिगड़ी बात

भारतीय विदेश सचिव निरुपमा राव ने कहा, "बातचीत के दौरान किसी भी समय विदेश मंत्री (एसएम कृष्णा) ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री की बात से सहमति नहीं जताई." वह पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के इस दावे के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब दे रही थीं कि जीके पिल्लई के बयान से बातचीत का माहौल खराब हो गया.

जब उनसे पूछा गया कि कृष्णा ने कुरैशी की बात का विरोध क्यों नहीं किया; तो राव ने कहा, "वहां बहुत सारे पत्रकार मौजूद थे और सवालों की बौछार के बीच हो सकता है कि विदेश मंत्री ने इस बारे में अपनी प्रतिक्रिया न दी हो."

राव ने टीवी पत्रकारों से बातचीत में कहा, "कृष्णा ने कभी कोई ऐसा संकेत नहीं दिया कि उनकी राय कुरैशी से मिलती है." उन्होंने यह कहते हुए पिल्लई का बचाव किया कि उन्हें भारतीय पक्ष को अपनी राय व्यक्त करने का पूरा अधिकार है. पिल्लई के मुताबिक मुंबई हमलों के दौरान शुरू से लेकर अंत तक सब कुछ पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर ही हुआ.

दोनों देशों की बातचीत पर राव ने कहा कि पाकिस्तान एक साथ सभी मुद्दों का पिटारा खोलना चाहता है. उनके मुताबिक, "हम बातचीत बहाल होने के खिलाफ नहीं हैं. हमने कभी ऐसा नहीं कहा. हम चाहते हैं कि बातचीत गंभीर हो और चलती रहे. हम सार्थक बातचीत चाहते हैं लेकिन यह काम धीरे धीरे हो."

कुरैशी का यह भी कहना है कि बातचीत के दौरान कृष्णा को बराबर दिल्ली से फोन पर हिदायत मिल रही थीं. लेकिन कृष्णा ने वापस दिल्ली पहुंचने पर कहा कि उन्होंने फोन पर कोई बात नहीं की है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस तरह की बात फोन पर हुई भी होती, तो इसमें क्या बुराई है.

शुक्रवार को हुई बातचीत और भारतीय प्रतिनिधिमंडल पर कुरैशी की टिप्पणियों पर राव ने कहा कि वह इससे हैरान हैं. उन्होंने कहा, "इस बातचीत को मैं विफल नहीं कहूंगी और न ही कोई ऐसा नतीजा निकालूंगी जिससे लगे कि अब आगे कोई उम्मीद नहीं है."

उधर बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि कुरैशी विदेश मंत्री बनने के काबिल नहीं है. उनका तो यहां तक कहना है कि इस तरह के गैर जिम्मेदाराना बयानों को देखते हुए तो कुरैशी किसी दूतावास में सेकंड सेक्रेटरी भी नहीं बन सकते हैं. विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने इस पूरे मामले पर कहा है कि अगर पाकिस्तान इस तरह का रुख जारी रखता है तो सरकार को इस बारे में दोबारा विचार करना चाहिए कि उसके साथ बातचीत को आगे बढ़ाना है या नहीं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः वी कुमार

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