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दुनिया

पारसियों की घटती आबादी से भारत सरकार चिंतित

भारत में जहां बढ़ती आबादी सरकार के लिए सिरदर्द रही है, वहीं पारसी समुदाय की घटती आबादी चिंता का कारण है. सरकार ने एक खास योजना शुरू की है जिसके तहत पारसियों की जनसंख्या बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाएंगे.

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रतन टाटा पारसी समुदाय के हैं.

पारसी भारत में पांच राष्ट्रीय सूचीबद्ध अल्पसंख्यकों में से एक हैं. अल्पसंख्यक मंत्रालय ने मौजूदा वित्त वर्ष के तीन खास योजनाएं तैयार की हैं जिनमें पारसियों की जनसंख्या में लगातार आ रही गिरावट को को रोकने के उपाय करना भी शामिल है. सरकार ने यह कदम राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की तरफ से पड़ने वाले दबाव के बाद उठाया है. आयोग ने एक सर्वे में पाया कि 1941 में जहां पारसियों की आबादी एक लाख 14 हजार थी, वहीं 2001 में यह घटकर सिर्फ 69 हजार रह गई है.

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री सलमान खुर्शीद ने बताया, "यह एक खास स्कीम है जिसमें पारसियों की आबादी में आ रही कमी पर रोक लगाई जाएगी. इसके तहत जागरुकता फैलाने के अभियान चलाए जाएंगे और पारसी लोगों को डॉक्टरी मदद भी दी जाएगी. जरूरत पड़ने पर उनकी मदद के लिए और भी कार्यक्रम शुरू किए जा सकते हैं."

यह योजना 2010-11 में लागू की जाएगी और इसके लिए एक करोड़ रुपये का बजट रखा गया है. सर्वे के बाद राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने सुझाव दिया कि इस समुदाय को देर से शादी करने या फिर शादी न करने के चलन को बदलना चाहिए. अध्ययन के मुताबिक, "पारसियों में शादी न करने वाले लोगों का अनुपात बहुत ज्यादा है, खासकर महिलाओं में." इस समुदाय में जन्मदर हर साल घट रही है. पारसियों की जन्मदर 2006 में 223 थी जो 2006 में घटकर 174 रह गई. 2007 के दौरान अगस्त महीने तक पारसी समुदाय में सिर्फ 99 बच्चों ने जन्म लिया.

सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि ज्यादातर पारसी उम्रदराज हैं. 30 प्रतिशत आबादी की उम्र 50 साल से ऊपर है, वहीं जवान और बच्चे आबादी का सिर्फ 12 प्रतिशत हैं. एक हजार साल पहले जब अरब लोगों ने ईरान पर विजय पाई तो 1,8000 पारसी भाग कर भारत आ गए थे और गुजरात में बस गए. उद्योग जगत में पारसियों ने बहुत नाम कमाया है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः आभा एम

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