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विज्ञान

पानी पर चिंतन का दिन

22 मई को दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के रूप में मनाया जा रहा है. इस साल पानी की सुरक्षा और बचत पर ध्यान दिया जा रहा है.

जैव विविधता की जब बात आती है तो हम अक्सर लुप्त होती प्रजातियों और जंगल के बारे में सोचने लगते हैं. लेकिन इस साल ध्यान दिया जा रहा है पानी पर. ऐसा इसलिए क्योंकि इसी साल को संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय जल सहयोग के वर्ष के तौर पर मना रहा है. पानी की किल्लत से कई जगहों पर फसलें बर्बाद हो रही हैं. इस ओर दुनिया का ध्यान खींचने की कोशिश है.

खेतों में बारिश का पानी

जल ही जीवन है, यह बात सब जानते हैं, फिर भी पानी की अत्यधिक बर्बादी की जाती है. अमेरिका में हर व्यक्ति रोजाना करीब 550 लीटर पानी इस्तेमाल करता है, जबकि भारत में यह संख्या 125 लीटर है. जहां पानी की कमी है, वहीं इसकी असली कीमत पता चलती है. दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया में बारिश के पानी को बचाने की कोशिशें चल रही हैं और इसकी मदद से खेत लहलहा रहे हैं. दुनिया के कई देशों की तरह बोलीविया में भी पहले बरसात का पानी बर्बाद हो जाया करता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है.

बोलीविया के पहाड़ों में रेन वॉटर हारवेस्टिंग यानी बारिश के पानी से खेती होने लगी है. भारत में भी कई जगहों पर ऐसा किया जाता है. बोलीविया में इस प्रोजेक्ट की देखरेख में 370 तालाब बनाए गए हैं. हर तालाब में हर सेकेंड 15 लीटर पानी जमा होता है. स्थानीय अधिकारियों को आताखादोस यानी इन तालाबों के रख रखाव का तरीका समझाया जाता है.

जर्मनी की मदद से

प्रोजेक्ट के समन्वयक जर्मनी के हांस योआखिम पिख्ट हैं. 60 साल के हांस इलाके में एक मिसाल बन गए हैं. हांस बताते हैं कि पहले यहां अलग अलग जगहों पर पानी आकर इकट्ठा हो जाया करता था, "आम तौर पर यह पानी ऊपर से ही बह जाता और नीचे घाटी में जाकर जमा हो जाता था. फिर वहां नदियां भर जातीं और काफी नुकसान होता था."

बिना पेड़ों वाली जमीन पर बारिश की तबाही का असर साफ दिखता है. बीते चार साल से जर्मन समाजविज्ञानी देश के गरीब इलाके नोर्ते पोतोसी के चक्कर काट रहे हैं. आए दिन गांव दर गांव जाकर वह किसानों की तकलीफ सुनते हैं. जब किसी तालाब से फिर पानी रिसने लगे तो खास सामान डाल कर रिसाव बंद किया जाता है. किसानों के लिए ऐसा रिसाव चिंता की बात है. तालाब सूखा तो उनके पशु और खेत प्यासे रह जाएंगे. पूरी तरह ढंग से काम करने वाला एक तालाब बनाने में साढ़े चार हजार यूरो यानी करीब सवा तीन लाख रुपये लगते हैं. हांस के सभी प्रोजेक्ट के अंतर्गत ज्यादातर तालाब एकदम फिट हैं.

आप भी दें योगदान

दुनिया भर में कई इलाकों को जैव विविधता की धरोहर की श्रेणी में डाल दिया गया है. इस पहल से कोशिश की जा रही है कि इन जगहों में पानी के स्रोत और जन जीवन को बचाया जा सके. पिछ्ला साल भी पानी से ही जुड़ा रहा. तब समुद्री जीवन की ओर लोगों का ध्यान खींचा गया था. दरअसल अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस को 1993 से मनाया जा रहा है और हर साल इसे किसी एक विशेष बिंदु पर केंद्रित किया जाता है.

हालांकि पहले यह 29 दिसंबर को मनाया जाता था, लेकिन क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों के कारण इस पर लोगों का ज्यादा ध्यान नहीं जाया करता था. इसी को ध्यान में रखते हुए तारीख बदल कर 22 मई कर दी गयी. इस दिन को इसलिए चुना गया क्योंकि 22 मई 1992 को ही कनवेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी (सीबीडी) पर हस्ताक्षर किए गए थे.

जैव विविधता बचाने के लिए जरूरी नहीं कि बड़े पैमाने पर ही काम किया जाए. यदि आप भी योगदान देना चाहते हैं तो अपने देश में स्थानीय समय सुबह दस बजे एक पेड़ लगाएं और इसे सीबीडी की वेबसाइट पर दर्ज करें.

रिपोर्ट: ईशा भाटिया

संपादन: ए जमाल

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