1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

पानी के संकट से जूझता भारत

पानी की समस्या ने भारत के कई राज्यों को अपनी चपेट में ले रखा है. जमीन के नीचे पानी का स्तर लगातार नीचे जा रहा है. साल दर साल गर्मी का पारा चढ़ रहा है और देश सूखे की गंभीर स्थिति का सामना कर रहा है.

दिहाड़ी मजदूर वृंदा कुमारी कड़ी धूप में बड़े धैर्य से बाल्टी और पानी की बोतलें लेकर नगर निगम के टैंकर का इंतजार कर रही हैं. दिल्ली और आसपास के इलाकों में तीन दिन में एक बार यह टैंकर पानी लेकर आता है. जैसे ही टैंकर नजर आता है प्यासे लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है और अफरा तफरी मच जाती है.

लोग पानी के टैंकर से अपने बर्तन भरने के लिए धक्कामुक्की करने लगते हैं. वृंदा बताती हैं, "कई बार हम खाली हाथ लौटते हैं और पानी खरीदना पड़ता है जो महंगा है. हमारे पास रास्ता ही क्या है. हमारे घरों में पानी की सप्लाई नहीं है और सरकारी हैंड पंप जो लगे हैं वो काम नहीं करते." पश्चिमी दिल्ली में दुकान चलाने वाले पदम गुप्ता भी पानी की कमी का रोना रोते हैं, "पीने के पानी की कमी से हमारे रोज के काम में बड़ी बाधा आती है. गरीब लोगों के कई इलाकों में तो और भी दिक्कत है, इतनी गर्मी में बगैर पानी के रह पाना बेहद मुश्किल है."

शहर की योजना बनाने वाले लोग कहते हैं कि दिल्ली में जमीन के नीचे के पानी का स्तर पहले ही खतरनाक स्तर तक जा चुका है. हर गुजरते दिन के साथ स्थिति बिगड़ती जा रही है. असमान बंटवारे और पानी की बर्बादी के साथ ही अवैध इस्तेमाल ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है. शहर में निर्माण के कारोबार में जुटे उत्तम गुप्ता ने डीडब्ल्यू से कहा, "शहरीकरण के दबाव में भूजल का स्तर लगातार नीचे जा रहा है."

सिर्फ दिल्ली ही नहीं...

पानी को लेकर एक दुविधा की स्थिति है जो देश के कई हिस्सों में दिखाई पड़ती है. तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और विशाल कृषि क्षेत्र ने देश में मौजूद पानी की सप्लाई पर दबाव बढ़ा दिया है. रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि देश में मौजूद पानी का 80 फीसदी खेती में इस्तेमाल होता है जबकि उद्योग इस पानी का 10 फीसदी से भी कम इस्तेमाल करते हैं.

तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के आस पास बना हुआ है. कई राज्यों में पानी की भारी कमी है. खासतौर से महाराष्ट्र का उत्तरी इलाका जहां बीड, नांदेड, परभणी, जालना, औरंगाबाद, नाशिक और सतारा सूखे की स्थिति का सामना कर रहे हैं. दक्षिणी कर्नाटक के ग्रामीण इलाकों में तो पानी के नाम पर दंगों की खबरें आ रही है. भारत के केंद्रीय भूजल बोर्ड के मुताबिक कम बारिश ने देश में भूजल का स्तर काफी घटा दिया है. देश के 55 फीसदी कुंओं में पानी का स्तर घट रहा है. दिल्ली और दक्षिणी राज्य आंध्र प्रदेश ने 2007 से 2012 के बीच सबसे ज्यादा कमी दी है.

संसाधनों की बुरा हाल

जानकार कहते हैं कि पानी का मौजूदा संकट सिर्फ पानी की कमी और मांग के बढ़ने की वजह से ही नहीं है इसमें पानी के प्रबंधन का भी बहुत बड़ा हाथ है. सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट से जुड़ीं नित्या जैकब ने डीडब्ल्यू से कहा, "यह इस बात का प्रतीक है कि देश में क्या हो रहा है जहां आबादी का घनत्व ज्यादा है, खेती के तरीके असंवेदनशील हैं और औद्योगीकरण बड़े स्तर पर हो रहा है."

हाल ही में आई वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट बताती है कि अगर नीति बनाने वालों ने जल संसाधन की व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया तो भारत के ज्यादातर बड़े शहर 2020 तक सूख जाएंगे. संरक्षणकर्ता इस ओर ध्यान दिलाते हैं कि पानी की सुरक्षा प्रमुख रूप से भोजन और ऊर्जा की सुरक्षा से जुड़ी है इसलिए एक कुशल तंत्र बनाना जरूरी है. भारत 2013 को "जल संरक्षण" साल के रूप में मना रहा है.

रिपोर्टः मुरली कृष्णन/एनआर

संपादनः आभा मोंढे

DW.COM

WWW-Links

संबंधित सामग्री