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विज्ञान

पानी की बोतल से रोशनी

जहां एक ओर हरी नीली पीली लाल बत्तियों से चमकते बड़े बड़े शहर हैं, वहीं दूसरी ओर घुप्प अंधेरे में गुम इसी शहर के कुछ हिस्से. शहरों में रहने वाले इन गरीब लोगों को रोशनी का कतरा नसीब नहीं होता.

ये गरीब लोग या तो अवैध तरीके से बिजली लेते हैं या फिर मोमबत्ती और लालटेन की रोशनी से काम चलाते हैं. अंधेरे में डूबा है मनीला की झुग्गी.

इसी अंधेरे से लड़ने की एक किफायती कोशिश. यहां टिन के टुकड़े को हिसाब से काटकर बिना बिजली के रोशनी बिखेरने वाला बल्ब बनाने की तैयारी हो रही है. कोका कोला की बोतल में फिट करते ही ढांचा तैयार है.

जिन्होंने यह प्रोजेक्ट शुरू किया है वह फिलीपीन्स के नामी कलाकार हैं, इलाक डियाज. वह अपने नाम और प्रभाव का इस्तेमाल गरीबी को हटाने और जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने के लिए कर रहे हैं. इस बदलाव के लिए काम में लिया जा रहा आयडिया भी प्रभावशाली है. जो बोतलें सामान्य तौर पर कचरे में फेंक दी जाती हैं, वही सबसे अंधेरे कोनों को रोशन करने के काम आ रही हैं वो भी बिना बिजली के.

इस रोशनी का राज है बोतल में भरा हुआ पानी. लीटर ऑफ लाइन नाम का संगठन इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है. साथ ही देश के अमीरों से मदद की गुहार और लोगों को जलवायु परिवर्तन के खतरे समझाने का काम भी. #big#

कैसे बनता है

एक लीटर की प्लास्टिक की बोतलों के आस पास टिन का ढांचा लगाते ही बल्ब तैयार हो जाते हैं. इनमें पानी भरने के बाद थोड़ा सा क्लोरीन मिलाया जाता है. इससे यह पानी साफ होता है और ज्यादा रोशनी देता है. क्लोरिन डालने के बाद बोतल को फिर पानी से पूरा भरा जाता है. अब बल्ब तैयार है.

छत में सुराख कर बोतल बल्ब लगाने में ज्यादा वक्त नहीं लगता. लेकिन सूरज की रोशनी को फैलाने वाला यह बल्ब रात में भी काम करे इसके लिए एक और तकनीक खोजी गई है. बल्ब के साथ सौर ऊर्जा वाली एलईडी लाइट भी जोड़ी जा रही है. लालटेन के ऊपर सोलर सेल लगे हैं जिनके कारण रात को इन्फ्रारेड लाइट बोतलों के जरिए कमरों में पहुंचती है.

युवा इंजीनियरों ने एक और तकनीक खोजी. उन्होंने सोलर पैनल वाली लाइट को बीम बनाकर बोतल में डाल दिया ताकि बोतल दिन रात जगमगाए. इस आसान तरीके से लोग हैरान हैं, लेकिन यह उतना सस्ता नहीं जितनी कि बोतल वाली लाइट. इलाक डियाज बताते हैं कि एक बल्ब करीब 20 डॉलर का है. लेकिन उम्मीद है कि काम पूरा होने तक इसकी कीमत 10 डॉलर रह जाएगी.

फिलीपीन्स में करीब 15 हजार बोतल लाइट्स लगाई जा चुकी हैं. इरादा है इस आयडिया को दुनिया भर में फैलाने का. 2015 तक दुनिया भर में 10 लाख इस तरह की लाइटें लगाई जाएंगी और कार्बनडायॉक्साइड का उत्सर्जन घटाया जा सकेगा. प्लास्टिक की बोतल वाली एक सोलर लाइट से साल में 200 किलोग्राम कार्बनडायॉक्साइड उत्सर्जन कम किया जा सकेगा.

फिलीपीन्स के एक करोड़ साठ लाख लोगों के जिंदगी में उजाला हो रहा है. वो भी आसान तकनीक का बल्ब जलाकर.

रिपोर्टः आभा मोंढे

संपादनः मानसी गोपालकृष्णन

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