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फीडबैक

पाठकों की पसंद मंथन

हर सप्ताह चाहे दूरदर्शन पर दिखाए जाने वाला टीवी शो मंथन हो या वेबसाइट पर लिखे आर्टिकलस, पाठकों से हमें फीडबैक मिलती रहती हैं. शेयर करते हैं आपसे क्या लिखते हैं पाठक...

इंसान की तरह हैं डॉल्फिन – डॉयचे वेले की वेबसाइट पर भारत सरकार द्वारा डॉल्फिन को गैर मानवीय जीव की श्रेणी में रखे जाने की एक अच्छी खबर पढ़ने को मिली. यद्यपि सच तो ये है कि अब तक पूरे विश्व में इस सबसे बुद्धिमान जीव को केवल मनोरंजन का एक पुतला भर समझा जाता रहा है. जापान की स्थिति तो इस संदर्भ में बहुत ही गम्भीर नजर आई जहां झुंड की झुंड डॉलफिनों को पकड़ लिया जाता है और काम लायक न रहने पर उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाता है. वैसे भारत के समाचारों में फिलहाल ऐसी चर्चा पढ़ने को नहीं मिली. इस खबर को पहली बार डॉयचे वेले की साइट पर पढ़ा. यकीनन भारत का ये प्रयास और देशों के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धान्त बन सकता है. हमें वैज्ञानिक लोरी मैरिनो के शोध जिसमें उन्होंने सिटिशियनों के मानवीय गुणों पर प्रकाश डाला है, नहीं भूलना चाहिए. एक बेहतरीन प्रस्तुति के लिए हार्दिक आभार.

रवि श्रीवास्तव, इंटरनेशनल फ्रेंडस क्लब, इलाहाबाद

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नील नदी के देश मिस्र के राष्ट्रपति मुरसी को सत्ता से बेदखल करने एवं इस घटना के पश्चात मिस्र की वर्तमान राजनैतिक परिस्थिति के बारे में ताजा जानकारी डॉयचे वेले के वेबसाइट से मिली. प्रसिद्ध साहित्यकार काफ्का की 130वीं जन्मतिथि पर उनके छोटे से जीवन पर डॉयचे वेले का विस्तारित समयोपयोगी लेख बहुत अच्छा लगा. हर शनिवार 'मंथन' देखने और सुनने के बाद विज्ञान, तकनीक, पर्यावरण, स्वास्थ्य संबंधी सारी जानकारियां प्राप्त हो जाती हैं. मैं बड़ी उत्तेजना के साथ मंथन का इंतज़ार करता हूं.

सुभाष चक्रबर्ती, नई दिल्ली

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बढ़ती ताकत है भारत: जॉन केरी - अमेरिका को अब पाकिस्तान को छोड़ कर भारत की ओर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए जो की दोनों देशों के हित में होगा. भारत को भी जापान, वियतनाम, साउथ कोरिया, फिलिपीन्स, इंडोनेशिया आदि देशों के साथ प्रगाढ़ संबंध बनाने होंगे तभी एशिया में शक्ति संतुलन बना रह सकता है

हरीश चन्द्र शर्मा, जिला अमरोहा, उत्तर प्रदेश

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डॉलर के मुकाबले रूपये का इस तरह गिरना इंडियन मार्किट के लिए संकट पैदा करने वाली स्थिति है. सही मायने में देखा जाये तो डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा ही नहीं गिरा है, बल्कि कई देश की मुद्राएं काफी नीचे गयी हैं. भारत की मुश्किल यह है कि उसे अपने लगभग सारे कच्चे पदार्थ बाहर से ही मंगवाने पड़ते हैं. इसके कारण बाहर से आने वाले पदार्थ तो महंगे होंगे ही, साथ ही इससे बने सामान भी ऊंची कीमतों पर बेचे जाएंगे . कुल मिलकर महंगाई और बढेगी .

डॉ. हेमंत कुमार, प्रियदर्शिनी रेडियो लिस्नर्स क्लब, भागलपुर, बिहार

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संकलनः विनोद चड्ढा

संपादनः आभा मोंढे

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