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दुनिया

'पागल' लड़की से शादी कौन करेगा

नौ साल की माहा जब मानसिक समस्याओं के लिए डॉक्टर के पास पहुंची, तो उससे कहा गया कि वह वहां दोबारा ना आए वरना उससे शादी कौन करेगा. जहां वह रहती है वहां मानसिक परेशानी कैसी भी हो, पागलपन ही समझी जाती है.

गाजा में रहने वाली फलीस्तीनी लड़की माहा को पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर के चलते बेचैनी और अवसाद की समस्या लगातार बनी हुई थी. मानसिक रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि इलाके में मानसिक समस्याओं के इलाज के लिए लड़कियों को डॉक्टर के पास ले जाना बदनामी की बात है. इससे लड़की के लिए वर ढूंढना मुश्किल हो सकता है.

गाजा की अल कुद्स यूनिवर्सिटी में जनस्वास्थ्य सलाहकार बसाम अल हम्माद बताते हैं, "इसे लोग बुराई की तरह देखते हैं और मानसिक रोगों के बारे में लोगों में जागरूकता की कमी है. लोगों को लगता है मानसिक बीमारियों का मतलब है भूत प्रेत या ऊपरी चक्कर. वो समझते हैं कि इस तरह की समस्याओं वाले लोग पागल होते हैं." हम्माद के मुताबिक यह कहानी सिर्फ माहा की नहीं है, बल्कि यहां की लड़कियों के लिए बेहद आम समस्या है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि संकट ग्रस्त इलाकों में मानवीय समस्याओं से जूझ रहे लोगों में छोटी से बड़ी मानसिक समस्याओं से गुजरने की संभावना 15 से 20 फीसदी तक बढ़ जाती है. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि हिंसा, अपनों की असामयिक मृत्यु, बेघर होने और तकलीफदेह जिंदगी से गुजरने वाली एक तिहाई आबादी मानसिक बीमारियों का शिकार हो जाती है.

हम्माद ने बताया कि गाजा के परिवार सिर्फ बेटियों ही नहीं बेटों के मानसिक इलाज को भी बुरा समझते हैं. लेकिन बेटियों के मामले में वे ज्यादा सतर्क रहते हैं कि डॉक्टर के पास ना जाएं क्योंकि मामला उनके रिश्ते ढूंढने का होता है.

गाजा में विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से काम कर रही मनोरोग चिकित्सक दया सायमा बताती हैं, "लोगों को लगता है कि मनोरोग से जूझ रही मां जब बच्चे को जन्म देती है तो उसका असर बच्चे में भी होता है. इसलिए भी वे ऐसी लड़की से शादी करने से झिझकते हैं जिसे किसी तरह की मानसिक समस्या हो."

गाजा में जारी संकट ने बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित किया है जो कि यहां करीब 18 लाख के करीब हैं. कई हालात से टूट चुके हैं और भविष्य को लेकर हताश हैं. हम्माद के मुताबिक लड़कियों के लिए अवसाद से निपटना इसलिए भी मुश्किल हो जाता है क्योंकि उनके पास लड़कों जैसे विकल्प नहीं. लड़के अपने दोस्तों से मिल लेते हैं, कभी खेल कूद तो कभी किसी दूसरी तरह की मस्ती में उनका दिल बहल जाता है, जबकि लड़कियों को घरों के अंदर रखा जाता है. उनके पास मेल जोल के ज्यादा विकल्प नहीं. पिछले कुछ समय से गाजा में मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में ध्यान दिया जाना शुरू हुआ है. चिकित्सा के मूल ढांचे में मानसिक स्वास्थ्य के विकल्पों को भी जोड़ा जा रहा है. उम्मीद है इससे मदद मिलेगी.

एसएफ/आईबी (थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन)

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