पाक मीडिया को फीकी लगी ओबामा यात्रा | दुनिया | DW | 08.11.2010
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दुनिया

पाक मीडिया को फीकी लगी ओबामा यात्रा

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत में हैं, लेकिन पड़ोसी पाकिस्तान के अखबारों में भी उनकी खबरे छाई रहीं. वहां की मीडिया ने भी अमेरिका में नौकरियों और भारत के साथ व्यापार पर ध्यान दिया.

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पाकिस्तानी टेलिविजन चैनलों ने लगातार ओबामा की खबरें दिखाईं और मुंबई और नई दिल्ली में भी उनके आगमन पर ताजा खबरे देते रहे. हालांकि सोमवार सुबह तक डॉन अखबार ने भारत और पाकिस्तान के बारे में ओबामा के तर्कों को हेडलाइन बना रखा था.

रविवार को एक लेख में अखबार ने ओबामा के पाकिस्तान का नाम लेने को गौर से देखा. मुंबई के ताज महल होटल में ओबामा के भाषण में नर्मी से काफी लोग चकित थे. डॉन में विश्लेषक माहरूफ रजा के हवाले से लिखा है, "पाकिस्तान का नाम न लेने का मतलब है कि पाकिस्तान उनकी(वॉशिंगटन) अफगान रणनीति में अहम भूमिका निभाता है...और इसलिए पाकिस्तान को उसकी सजा नहीं मिलेगी."

जंग ग्रुप की वेबसाइट द न्यूज में भी खबरें ओबामा के पाकिस्तान भाषण पर केंद्रित हैं. लिखा है, "अमेरिका पाकिस्तान को अफगानिस्तान की स्थिरता के लिए अहम मानता है लेकिन इस्लामाबाद के साथ अमेरिका के जटिल संबंध वॉशिंगटन की विदेश नीति की सबसे बड़ी चुनौती हैं."

अखबार डेली टाइम्स ने अपने संपादकीय में ओबामा की यात्रा का विश्लेषण किया है. इसमें भी माना जा रहा है कि ओबामा के भारत दौरे का एक बड़ा मकसद अमेरिका की अर्थव्यवस्था में नौकरियों से स्थिरता लाना है. साथ ही भारत और अमेरिका के बीच हथियारों और सैन्य आपूर्ति पर भी बात की गई है. हालांकि संपादक इसमें कश्मीर मुद्दे पर बातचीत न होने पर कुछ निराश हैं. वह लिखते हैं, "सरकार ने उम्मीद जताई थी कि अमेरिका भारत के साथ कश्मीर मुद्दा उठाएगा. लेकिन भारत के साथ लंबे समय तक संबंध बनाए रखने की अमेरिका की उम्मीद को देखते हुए इस मुद्दे पर बहस सपने देखने जैसा है."

हालांकि मुंबई में भाषण देते हुए पाकिस्तान के बारे में न बोलने की बात को लेकर उन्होंने खुशी जताई गई है. संपादकीय में लिखा है कि ओबामा की यात्रा 2006 में जॉर्ज बुश की यात्रा के मुकाबले काफी फीकी लगती है. उस वक्त भारत ने अमेरिका के साथ असैन्य परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.

रिपोर्टः एमजी

संपादनः वी कुमार

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