पाक तालिबान की विदेशी कंपनियों को चेतावनी | दुनिया | DW | 16.06.2014
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दुनिया

पाक तालिबान की विदेशी कंपनियों को चेतावनी

पाकिस्तान के तालिबान ने विदेशी कंपनियों को देश छोड़ देने को कहा है. यह चेतावनी तालिबान ने पाकिस्तानी सेना के उत्तरी वजीरिस्तान में सैन्य कार्रवाई का जवाब में दी है.

पाकिस्तान की सरकार ने उत्तर पश्चिम में तालिबान के लड़ाकों से निबटने के लिए टैंक, सैनिक टुकड़ियां और लड़ाकू विमान तैनात किए हैं. कुछ दिनों पहले कराची के हवाई अड्डे पर हुए आतंकी हमलों के बाद पाकिस्तानी सेना ने उत्तर वजीरिस्तान के कबायली इलाके में सैन्य कार्रवाई की है. इस इलाके को तालिबान और अल कायदा लड़ाकों का गढ़ माना जाता है.

पाकिस्तान के मित्र देशों, खास कर अमेरिका ने उत्तर पश्चिम में सैन्य हमले की मांग की है ताकि हक्कानी नेटवर्क जैसे आतंकी गुटों को वहां से हटाया जा सके. पाकिस्तानी अधिकारियों को इससे पहले डर था कि वहां के कबायली नेता इस कार्रवाई से नाराज हो जाएंगे लेकिन कराची पर हमलों के बाद सैन्य कार्रवाई का फैसला लिया गया.

Pakistan Waziristan Armeeoffensive 16.06.2014

पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई

पाकिस्तान सरकार पर निशाना साध रहे तालिबान ने विदेशी कंपनियों को चेतावनी दी है कि वह सरकार से व्यापार करना बंद करें और सेना को समर्थन देना बंद करें. तहरीक ए तालिबान के प्रवक्ता शाहिदुल्लाह शाहिद ने कहा, "हम सारे विदेशी निवेशकों, एयरलाइंस और मल्टीनेशनल कंपनियों को आगाह करते हैं कि उन्हें पाकिस्तान के साथ अपने काम को तुरंत छोड़ना होगा, नहीं तो वह अपने नुकसान के खुद जिम्मेदार होंगे." शाहिद के मुताबिक तालिबान नवाज शरीफ की सरकार और पंजाबी राजनीति को कबायली मुस्लिमों की मौत का जिम्मेदार मानती है और तालिबान लाहौर और इस्लामाबाद में उनके "महलों" को जला देगा.

इस चेतावनी के बाद लाहौर, इस्लामाबाद और कराची में भारी संख्या में सैनिक तैनात किए गए हैं. उत्तर पश्चिम के खैबर पख्तूनख्वा में सरकार ने इमर्जेंसी घोषित कर दी है और अस्पतालों से कहा है कि वह घायल लोगों के इलाज के लिए तैयार रहें. इस बीच पाकिस्तानी वायुसेना के विमानों ने लड़ाकों के गढ़ों पर बमबारी शुरू कर दी है. सरकार का कहना है कि अब तक तालिबान के 177 सदस्य मारे जा चुके हैं. इलाके से 60,000 से ज्यादा लोग पाकिस्तान के दूसरे सुरक्षित इलाकों और अफगानिस्तान के खोस्त जा रहे हैं. पाकिस्तानी के इस ऑपरेशन का नाम "जर्ब ए अज्ब" रखा गया है.

एमजी/एमजे (डीपीए, एएफपी)

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