1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

जर्मन चुनाव

पाक टीम को मिलेगी भारत आने की इजाजत!

भारत पाकिस्तान की टीम को मुंबई हमले की जांच से जुड़े प्रमुख अधिकारियों से पूछताछ करने की इजाजत दे सकता है. लेकिन पहले बॉम्बे हाई कोर्ट को देनी होगी हरी झंडी. पाकिस्तान में मुंबई हमलों की सुनवाई में इसी के चलते देरी.

default

सूत्रों ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया है कि बॉम्बे हाई कोर्ट का इस मामले में रुख जान लेने के बाद भारत सरकार पाकिस्तान को अपने फैसले से अवगत करा देगा. अगले हफ्ते तक इस संबंध में फैसला ले लिए जाने की उम्मीद है.

पाकिस्तान से एक टीम भारत आकर एडीशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मेजिस्ट्रेट आरवी सावंत वाघुले और जांच अधिकारी रमेश महाले से पूछताछ करना चाहती है. इन्हीं दोनों अधिकारियों ने 26 नवंबर 2008 को आतंकवादी हमले के दौरान पकड़े गए अजमल कसाब के बयान लिए थे.

पाकिस्तान टीम उन डॉक्टरों से भी बयान लेना चाहती है जिन्होंने आरोपियों और आतंकवादियों का पोस्टमॉर्टम किया. सूत्रों के मुताबिक भारत को पाकिस्तानी टीम के पूछताछ करने में परेशानी नहीं है लेकिन इस संबंध में हाई कोर्ट की राय जरूरी है. "हम चाहते हैं कि 26/11 मामले की सुनवाई पाकिस्तान में पूरी हो और आरोपियों को सजा मिले. अगर बॉम्बे हाई कोर्ट अपनी रजामंदी दे देती है तो भारत को इस मामले में कोई दिक्कत नहीं है."

Indien Terroranschläge Mumbai Bombay Terror Gedenken 26/11 Flash-Galerie

मुंबई हमलों की सुनवाई करने वाले विशेष जज एमएल तहलियानी ने अजमल कसाब को दोषी करार देते हुए मौत की सजा सुनाई है और अब हाई कोर्ट से फैसले पर मुहर का इंतजार है. मुंबई हमले की दूसरी बरसी पर भारत ने पाकिस्तान से कहा कि हमले के जिम्मेदार लोगों को सजा दी जानी चाहिए. भारत का कहना है कि मुंबई हमले के सिलसिले में पाकिस्तान ने ठोस कार्रवाई नहीं की है.

भारत का कहना है कि 26/11 हमले के दौरान पाकिस्तान से आतंकियों को निर्देश देने वाले और उन्हें ट्रेनिंग देने वाले करीब सात लोग थे और इनमें दो पाकिस्तानी सेना के अधिकारी भी हैं.

जून में इस्लामाबाद में पाकिस्तानी नेताओं से मुलाकात के दौरान भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने आरोपियों के नाम पाकिस्तान को सौंपे हैं. पाकिस्तान का कहना है कि उसकी टीम को भारत आकर पूछताछ करने की इजाजत नहीं मिल रही है जिसके चलते मुकदमा आगे नहीं बढ़ पा रहा है.

रिपोर्ट: एजेंसियां/एस गौड़

संपादन: ए जमाल

DW.COM

संबंधित सामग्री