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जर्मन चुनाव

पाक की खुशी के लिए भारत को नहीं बुलाया

इस साल की शुरुआत में अफगानिस्तान पर तुर्की ने जो सम्मेलन आयोजित किया था, उससे भारत को जानबूझकर दूर रखा गया. इसकी वजह विकीलीक्स के ताजा खुलासे में सामने आई है.

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विकीलीक्स ने जो अमेरिकी दस्तावेज जारी किए हैं उनमें से एक में तुर्की में हुए अफगानिस्तान सम्मेलन का जिक्र भी है. तुर्की ने इस सम्मेलन में भारत को इसलिए नहीं बुलाया क्योंकि वह पाकिस्तान को खुश करना चाहता था. पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बात का दबाव बनाया था कि भारत को अफगानिस्तान के हर मामले से दूर रखा जाए. इस बारे में तुर्की के एक राजनयिक ने अमेरिकी अधिकारियों से कहा कि पाकिस्तान की खातिर ही भारत को नहीं बुलाया गया. अमेरिकी विदेश मंत्रालय में राजनीतिक मामलों के अंडर सेक्रेटरी विलियम बर्न्स के साथ एक मीटिंग में तुर्की के राजनीतिक मामलों के तत्कालीन डिप्टी अंडर सेक्रेटरी राउफ एन्गिन सोयसाल ने यह बात कही थी.

पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इस सम्मेलन में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करजई से मुलाकात की. अमेरिका के विदेश मंत्रालय का 25 फरवरी 2010 को भेजा गया एक संदेश कहता है, "सोयसाल ने बताया कि तुर्की ने पाकिस्तान की चिंताओं के मद्देनजर ही भारत को नहीं बुलाया. हालांकि सोयसाल का दावा है कि पाकिस्तान इस बात को अच्छी तरह समझता है कि दक्षिण एशियाई मामलों से भारत को दूर रखने की उसकी कोशिश एक गलती है."

सोयसाल 2007 से 2009 के बीच पाकिस्तान में तुर्की के राजदूत रहे. उन्हें यूएन महासचिव बान की मून ने पाकिस्तान की मदद के लिए विशेष दूत नियुक्त किया है. केबल के मुताबिक, "सोयसाल ने बताया कि भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तुर्की के राष्ट्रपति गुल के भारत दौरे के दौरान पाकिस्तान मामले में मदद मांगी थी. सिंह की इस दरख्वास्त पर गुल ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति को फोन भी किया."

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः महेश झा

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