पाकिस्तान में सिकंदर के वंशज | विज्ञान | DW | 28.06.2016
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विज्ञान

पाकिस्तान में सिकंदर के वंशज

2000 साल पहले सिकंदर जब भारत से वापस लौटा तो उसके कई सैनिक रास्ते में ही बस गये. उनके वंशज और उनके बसाये शहर अब सामने आ रहे हैं.

पाकिस्तान के हिमालयी इलाकों में आज भी ऐसे लोग मिल जाते हैं, जो भारतीय उपमहाद्वीप के लोगों जैसे बिल्कुल नहीं लगते. वो आज भी पुरानी ग्रीक सभ्यता वाले रीति रिवाज जारी रखे हुए हैं. इन्हें कैलाश कहा जाता है. उनके धार्मिक कर्मकांड ऋगवेदकालीन आर्यों से मिलते जुलते हैं.

माना जाता है कि ये सिकंदर के वशंज है. भारत पर हमले और फिर राजा पुरु से संधि के बाद सिकंदर जब सिंधु तट से वापस लौटा तो उसकी सेना काफी थक चुकी थी. यूनान (ग्रीस) से लेकर पश्चिमी भारत तक का इलाका जीतने के बाद सैकड़ों सैनिकों में वापस लौटने की हिम्मत नहीं बची थी.

इतिहासकारों के मुताबिक सैकड़ों सैनिक यूनान वापस लौटने के बजाए भारत में ही बस गए. उन्होंने हिमालय की कैलाश वादी को अपनी रिहाइश के लिए चुना. स्थानीय महिलाओं के साथ उनके संबंध बने और घर बार बस गया. इन्हीं के वंशजों को कलाशा कहा जाता है. पाकिस्तान में फिलहाल करीब कैलाश समुदाय के 4,000 लोग हैं.

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आज भी पुरातन यूनानी रीति रिवाज

अब स्वात में भी एक पुरातन इंडो-ग्रीक शहर के सबूत मिले हैं. खैबर पख्तूख्वा प्रांत की स्वात घाटी में इटली और पाकिस्तान के रिसर्चरों ने मिलकर इस पुरातन शहर की खोज की है.

पाकिस्तानी पुरातत्वशास्त्री नियाज शाह के मुताबिक, "ऐतिहासिक संदर्भ और पुरातात्विक तथ्यों के आधार पर हम इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि ग्रीक लोग यहां एक समुदाय की तरह रहे." खुदाई में मिले शहर के चारों ओर एक सुरक्षा दीवार है. वहां हथियारों के भी अवशेष मिले हैं. खोजकर्ताओं का मानना है कि यह शहर सिकंदर की सेना का हिस्सा रहा है.

शाह कहते हैं, "सिकंदर के भारत आने वाले रास्ते पर ग्रीक सभ्यता के निशान मिले हैं लेकिन हमारी जानकारी में यह पहला शहर है जो योजनाबद्ध तरीके से बसाया गया."

लेकिन यह ऐतिहासिक सभ्यता खतरे की जद में भी है. पाकिस्तान में तालिबान और इस्लामी कट्टरपंथ के बढ़ते प्रभाव की आंच कैलाश समुदाय पर भी पड़ रही है. हमलों और जबरन धर्म परिवर्तन की कुछ घटनाओं के बाद पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने कैलाश समुदाय की रक्षा का आदेश दिया.

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