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ताना बाना

पाकिस्तान में मरे सबसे ज्यादा पत्रकार

पाकिस्तान 2010 में पत्रकारों के लिए सबसे घातक देश रहा. इस दौरान काम करते हुए कम से कम आठ मीडियाकर्मियों की मौत हुई. पत्रकारों के एक संगठन ने ये आंकड़े जारी किए हैं.

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अपनी सालाना रिपोर्ट में कमेटी टु प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स नाम के संगठन ने कहा है कि दुनियाभर में 42 पत्रकारों की मौत हुई. हालांकि पिछले साल के मुकाबले यह संख्या कम है. 2009 में 72 मीडियाकर्मी काम करते हुए जान गंवा बैठे थे. लेकिन संगठन का कहना है कि 42 भी कोई छोटी संख्या नहीं है और बताती है कि पत्रकारों के लिए काम करना कितना मुश्किल है.

संगठन के एग्जेक्यूटिव डायरेक्टर जोएल सिमोन ने कहा, "यह संख्या भी अस्वीकार्य है. इससे पता चलता है कि दुनियाभर में पत्रकारों को कितनी हिंसा झेलनी पड़ती है."

पत्रकारों की मौत की सबसे बड़ी वजह कत्ल को बताया गया है. हालांकि पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सोमालिया और थाईलैंड जैसे देशों में हुए आत्मघाती हमलों में भी काफी पत्रकार मारे गए. पाकिस्तान में ही छह पत्रकार एक आत्मघाती हमले का शिकार हुए और 20 मीडियाकर्मी घायल हुए. सिमोन ने कहा कि पाकिस्तान में पत्रकारों की मौतें बताती हैं कि देश किस कदर खतरनाक हिंसा में जकड़ा हुआ है. उन्होंने कहा, "कई सालों से पाकिस्तान में पत्रकार आतंकवादियों के हाथों मारे जा रहे हैं लेकिन आत्मघाती हमलों के बाद खबरों के लिए काम करना और मुश्किल हो गया है."

2010 में 20 देशों में पत्रकारों की मौतें हुईं. पाकिस्तान के बाद इराक में सबसे ज्यादा चार पत्रकार मारे गए. उसके बाद होंडूरास और मेक्सिको में तीन तीन मीडियाकर्मियों की मौत हुई.

पिछले साल मरने वाले पत्रकारों की तादाद ज्यादा होने की बड़ी वजह फिलीपीन्स में हुआ नरसंहार था जिसमें दो दर्जन पत्रकारों को गोलियों से भून दिया गया. सिमोन कहते हैं कि पत्रकारों की मौत की जांच में सरकारों की विफलता हिंसा को और बढ़ावा देती है. संगठन की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक पत्रकारों की हत्या के 90 फीसदी मामले हल नहीं हो पाते.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ए कुमार

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