1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

मनोरंजन

पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों पर रोक

पाकिस्तान की एक अदालत ने भारतीय सिनेमा के प्रदर्शन पर देश भर में पाबंदी लगा दी है. हालांकि शर्तों के साथ उसने कुछ फिल्मों को रिलीज करने का रास्ता भी रखा है. .

लाहौर हाईकोर्ट के न्यायाधीश खालिद महमूद ने विवादास्पद टॉक शो के होस्ट मुबश्शिर लुकमान की याचिका पर फिल्मों के प्रदर्शन पर रोक के अंतरिम आदेश जारी किए हैं. पूर्व निर्माता लुकमान भारत विरोधी रुख के लिए जाने जाते हैं. लुकमान ने दावा किया है कि पाकिस्तानी कानून के मुताबिक जो फिल्म पूरी तरह से भारत में बनाई गई है और जो पूरी तरह से भारतीय द्वारा प्रायोजित है वह पाकिस्तान में नहीं प्रदर्शित की जा सकती. उन्होंने आरोप लगाया कि 'फर्जी दस्तावेज' की मदद से प्रायोजक की पहचान को बदला जा रहा है जिससे भारतीय फिल्में पाकिस्तान में प्रदर्शित की जा सके. उन्होंने अपनी दलील को मजबूत बनाने के लिए कोर्ट के आदेश की कॉपी भी पेश की. कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह उन फिल्मों के प्रदर्शन पर रोक लगाए जिनको 'फर्जी' दस्तावेज की मदद से पाकिस्तान में लाया गया है और जिनका प्रायोजक कोई पाकिस्तानी या फिर विदेशी नागरिक नहीं है. साथ ही अदालत ने याचिका पर फिल्म सेंसर बोर्ड और रेवन्यू बोर्ड को जवाब देने को कहा है. मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को होगी.

पहले टीवी चैनल पर जुर्माना

कोर्ट का आदेश उस कार्रवाई के बाद आया है जिसमें पाकिस्तान की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नियामक प्राधिकरण ने 10 चैनलों पर एक करोड़ पाकिस्तानी रुपये का जुर्माना लगाया है. नियामक ने पाकिस्तान में भारत समेत दूसरे देशों के कार्यक्रम ज्यादा दिखाने वाले 10 मनोरंजन टीवी चैनलों पर जुर्माना ठोका है. इन चैनलों पर भारतीय सीरियल और सिनेमा दिखाने के आरोप हैं. देश के निजी टीवी चैनलों को अपने कुल कार्यक्रमों में से केवल 10 प्रतिशत विदेशी कार्यक्रम प्रसारित करने के निर्देश मिले हुए हैं. विदेशी कार्यक्रमों में भी बंटवारा है. इसमें 60 प्रतिशत कार्यक्रम भारतीय या दूसरी भाषा के जबकि 40 प्रतिशत अंग्रेजी के कार्यक्रम हो सकते हैं.

2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने भारतीय सिनेमा को लेकर आयात नियमों में ढील दी थी. जिसके बाद से भारतीय फिल्मों ने पाकिस्तान के बॉक्स ऑफिस में जान फूंक दी. 1965 की जंग के बाद भारतीय फिल्मों पर पाकिस्तान में प्रतिबंध लग गया था. हालांकि चोरी से लाई गई फिल्में देशभर में खुलेआम मिलती रहीं. भारत में रिलीज होने के साथ साथ बॉलीवुड की फिल्में पाकिस्तान में भी रिलीज होती आई हैं. भारतीय फिल्में पाकिस्तान के लोगों को सिनेमाघरों में वापस ले कर आई हैं. भारतीय फिल्मों की कामयाबी की वजह से ही इस्लामाबाद और लाहौर में कई नए सिनेप्लेक्स बने हैं.

एए/एनआर (पीटीआई)

DW.COM

संबंधित सामग्री