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खेल

पाकिस्तान में फुटबॉल लीग

पाकिस्तान अब भारत में अत्यंत सफल क्रिकेट प्रीमियर लीग की तर्ज पर फुटबॉल लीग शुरू करने की योजना बना रहा है. क्रिकेट खेलने वाले देश पाकिस्तान में खेलने से डरते हैं तो फुटबॉल की लोकप्रियता लगातार कम हो रही है.

पाकिस्तान फुटबॉल फेडरेशन प्रस्तावित लीग के बारे में संभावित प्रायोजकों से बात कर रहा है. लीग में विभिन्न शहरों की पांच टीमें होंगी और उसके मैच लाहौर में होंगे. पाकिस्तान में इस समय एक प्रीमियर लीग है जो पिछले नौ साल से चल रहा है. लेकिन कोच और खेल प्रेमी मैचों के खराब स्तर और खस्ताहाल मैदानों की शिकायत करते हैं. पाकिस्तान प्रीमियर लीग में सरकारी टीमों का दबदबा है जो भारी भरकम बजट की मदद से अच्छी प्रतिभाओं को लपक लेते हैं. प्राइवेट क्लबों के लिए न तो खिलाड़ी बचते हैं और न ही धन वाले प्रायोजक पाने की संभावना.

नतीजा ये हुआ है कि खेल प्रेमी और प्रायोजक पाकिस्तान प्रीमियर लीग की टीमों को समर्थन देने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. इस समय लीग का चैंपियन खान रिसर्च लेबोरेट्रीज है. लीग के मैचों का टेलीविजन पर प्रसारण नहीं होता और मैदान पर भी अधिकांश मैचों में कुछ सौ दर्शक ही होते हैं. पाकिस्तान फुटबॉल फेडरेशन के मार्केटिंग कंसल्टेंट नवीद हैदर खान नया टूर्नामेंट पाकिस्तान फुटबॉल के लिए वरदान साबित हो सकता है, "हम खेल को ग्लैमराइज करना चाहते हैं, हम इसे भारत के आईपीएल की तरह चलाना चाहते हैं."

यह टूर्नामेंट प्रायोजकों पर निर्भर होगा लेकिन पाकिस्तान फुटबॉल फेडरेशन इसे मई या सितंबर में आयोजित करना चाहता है. और नवीद खान का कहना है कि यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो अगले साल इसका विस्तार किया जाएगा और विदेशी खिलाड़ियों को भी इसमें शामिल करने की कोशिश होगी.

पड़ोसी अफगानिस्तान में इस तरह का एक प्रयास काफी सफल रहा. काफी लोग मैच देखने आए और टेलीविजन पर भी वह बहुत लोकप्रिय साबित हुआ. पाकिस्तान फुटबॉल फेडरेशन ने 2022 तक विश्वकप में क्वालिफाई करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन 2004 में प्रीमियर लीग शुरू होने के बाद से राष्ट्रीय टीम ने शायद ही कोई प्रगति की है. हाल में वे फीफा रैंकिंग में 189वें स्थान पर थे. खान रिसर्च लेबोरेट्रीज की टीम को लीग में जीत दिलवाने वाली टीम के कोच तारीक लुत्फी का कहना है कि यह प्रतियोगिता खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय खेल के लिए तैयार नहीं करती.

आतंकवाद का सामना कर रहे पाकिस्तान में सुरक्षा के अलावा धन भी समस्या है. क्रिकेट की छांह में फुटबॉल को भी प्रायोजक नजरअंदाज कर रहे हैं. उसे काम चलाने के लिए फीफा और एशियाई फुटबॉल कंफेडरेशन की मदद पर निर्भर करना पर रहा है. लेकिन पाकिस्तान फुटबॉल फेडरेशन खेल के विकास पर ध्यान दे रहा है. अगले सीजन से प्रीमियर लीग की टीमों को 19 साल से कम उम्र के कम से कम दो खिलाड़ियों को रखना होगा. इस साल फीफा की मदद से कई फुटबॉल अकादमी भी खोले जा रहे हैं.

एमजे/एजेए (एएफपी)

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