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जर्मन चुनाव

पाकिस्तान में नाटो हमले का विरोध

पाकिस्तान ने उसकी सीमा में किए गए नाटो के हेलिकॉप्टर हमले की तीखी शब्दों में निंदा की है और इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताया है. दूसरी तरफ नाटो की संयुक्त सेना का कहना है कि उसे सुरक्षा के लिए हर कदम उठाने का अधिकार है.

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वजीरिस्तान का नजारा

अफगानिस्तान में तैनात नाटो के नेतृत्व वाली आइसैफ सेना ने शुक्रवार को पाकिस्तानी सीमा के अंदर घुस कर हेलिकॉप्टर से हमला किया, जिसमें 30 से ज्यादा चरमपंथी मारे गए. पाकिस्तान का कहना है कि नाटो सेना के हेलिकॉप्टरों ने दो बार खोस्त के रास्ते उनकी सीमा में अतिक्रमण किया. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल बासित ने कहा, "ये कार्रवाई सीधे सीधे संयुक्त राष्ट्र के नियमों की अवहेलना है और आइसैफ की सेना यूएन के नियमों के तहत ही काम कर रही है."

दूसरी तरफ आइसैफ का कहना है कि खोस्त के दूर दराज वाले इलाके में उनकी एक चौकी पर हमला किया गया, जिसके बाद उन्होंने पाकिस्तान की सीमा में रगेद कर चरमपंथियों पर हमला किया. आइसैफ ने एक बयान जारी कर कहा, "हमारी सेना ने दुश्मन की तरफ से गोलीबारी देखी. इसके बाद हमने अपने नियमों के तहत सीमा पार कर उन पर हमला किया."

Flash-Galerie Pakistan: Flüchtlinge aus Waziristan

नाटो ने साफ किया कि किसी थल सैनिक ने सीमा पार नहीं की है और इस पूरी कार्रवाई में कोई आम शहरी हताहत नहीं हुआ है. नाटो ने बताया कि उनके दो हेलिकॉप्टरों ने अपने हमले में 30 चरमपंथियों को मार गिराया और बाद में शनिवार को भी उन्होंने चरमपंथियों पर हमला किया. आइसैफ के मुताबिक उनके हेलिकॉप्टरों ने थोड़े समय के लिए सीमा पार की.

इस मुद्दे पर नाराज पाकिस्तान का कहना है कि आइसैफ की सीमा अफगान सरहद पर खत्म हो जाती है. विदेश मंत्रालय के बयान में इसे अस्वीकार्य बताया गया है. इसने चुनौती दी है कि ऐसी परिस्थितियों में पाकिस्तान जवाबी कार्रवाई कर सकता है.

समझा जाता है कि इस मामले के बाद पाकिस्तान का अमेरिका और अफगानिस्तान के साथ रिश्तों पर असर पड़ सकता है. आइसैफ सेनाएं पहले ही पाकिस्तान की सीमा में घुस कर ड्रोन हमले कर रही है. पाकिस्तान में अफगान सीमा पर कई जगहों को तालिबान का गढ़ समझा जाता है और अमेरिका कई मौकों पर इस पर चिंता जता चुका है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए जमाल

संपादनः एन रंजन

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