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दुनिया

पाकिस्तान में नाटो हथियारों का बाजार

नाटो सेना अफगानिस्तान से जाने की तैयारी में जुटी हैं. उनके कुछ हथियार पाकिस्तान के बाजारों में बेचे जा रहे हैं. खबर तो यह भी आ रही है कि ये आधुनिक हथियार तस्करों के जरिए प्रतिबंधित गुटों के हाथों में भी पहुंच रहे हैं.

पेशावर का कारखानो मार्केट स्मगल की हुई विदेशी चीजों के कारोबार की मशहूर जगह है. चाहे अमेरिकी स्नाइपर राइफल हो या फिर चीनी लैपटॉप. यहां सब कुछ मिलता है. यह बाजार पश्चिमोत्तर पाकिस्तान की खैबर एजेंसी में है, जो अफगानिस्तान से काफी करीब है और यह स्वायत्त है, यानी पाकिस्तान की सरकार के नियंत्रण में भी नहीं. यहां से और दूसरे कबायली इलाकों से भी अवैध हथियार पेशावर के बाजार में लाए जाते हैं. पेशावर हिंसाग्रस्त खैबर पख्तूनख्वाह प्रांत की राजधानी है.

आतंकवाद पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि हथियारों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है. इन दिनों पेशावर के इस बाजार में उन हथियारों की भरमार है, जिन्हें नाटो सेना ने अफगानिस्तान में इस्तेमाल किया था. चूंकि नाटो सेना 2014 में लौटने की तैयारी कर रही है, तो उनके इस्तेमाल किए हुए हथियार अवैध तरीके से अफगानिस्तान से पाकिस्तान लाए जा रहे हैं. नाटो का साजो सामान और हथियार ले जाने वाले ट्रकों पर भी अक्सर चरमपंथी गुट हमला करते हैं फिर ये सामान चुरा कर बाजारों में बेचते हैं. यहां के बाजार में पिस्टल, कालाश्निकोव, रात को दिखाई देने वाले गॉगल्स, हंसिया, सैनिक यूनिफॉर्म, स्लीपींग बैग, लैपटॉप, कैमरा और दवाइयां सब मौजूद है.

स्नाइपर राइफलों की इस बाजार में बहुत मांग है. इन्हें कबायली मिलिशिया गुट खरीदते हैं. इनकी मांग इतनी ज्यादा है कि पिछले कुछ सालों में इन राइफलों की कीमत कई गुना बढ़ गई है. अच्छी राइफल की कीमत पाकिस्तान के रुपयों में एक लाख तक हो सकती है. हालांकि बाजार के अवैध और काले होने के कारण हथियार खरीदने में मशक्कत करनी पड़ती है. इन्हें पाने के लिए खरीदार के पास सही आदमी का पता भी होना चाहिए.

पुलिस का इनकार

पेशावर की पुलिस चौकी पर तैनात एक पुलिस अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, "इस मार्केट में किसी तरह के अवैध हथियारों की बिक्री नहीं होती. आपको जो बाजार में मिलता है वह चीनी सामान है, यह पूरे देश में कहीं भी नहीं मिलेगा. पेशावर के बाजार में आपको एक भी हथियार नहीं मिलेगा." हालांकि उन्होंने यह भी माना कि पास के कबायली इलाकों में अवैध हथियार बिक रहे हैं. वे बताते हैं, "उन इलाकों में हमारा अधिकार नहीं है, लेकिन मैं आपको ये भरोसा दे सकता हूं कि पेशावर में अवैध हथियारों की तस्करी नहीं हो सकती."

हालांकि सुरक्षा बलों के अधिकारी और आतंक निरोधी अधिकारी इससे सहमत नहीं. वे कहते हैं कि अवैध हथियार कबायली इलाकों से होते हुए पूरे देश में बिना किसी रोकटोक के पहुंच जाते हैं. पाक अफगान बिजनेस फोरम के निदेशक जिया उल हक सरहदी भी ये मानते हैं. वे कहते हैं, "अधिकारी अफगानिस्तान से पाकिस्तान आने जाने वाले ट्रकों की चेकिंग नहीं करते. किसी को पता नहीं कि इन ट्रकों में क्या है. पिछले दस साल में पाकिस्तान के अधिकारी सीमा पार हथियारों की तस्करी पर कोई नियंत्रण नहीं कर पा रहे हैं."

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मेड इन अमेरिका

अमेरिका में बने सामान पाकिस्तान में बहुत पसंद किए जाते हैं. पेशावर के अवैध मार्केट में बिकने वाले रकसैक और जूते काफी सस्ते मिलते हैं. वे दुकानों की तुलना में बहुत ही कम कीमतों पर मौजूद हैं. अमेरिका में बने हुए जूते इन अवैध बाजारों में सिर्फ तीन हजार रुपये में मिल जाते हैं जबकि दुकानों में इनकी कीमत 20 हजार रुपये से कम नहीं. कुछ दुकानदारों का कहना है कि ये अवैध नहीं हैं, इनकी कीमत इसलिए कम है क्योंकि इस पर कोई कस्टम ड्यूटी नहीं लगी. हालांकि डॉयचे वेले ने पता लगाया कि ये जूते गैंग्स या चरमपंथी गुटों ने नाटो के कंटेनरों से लूटे हैं, इसलिए सस्ते हैं.

कुछ सूत्रों का दावा है कि नाटो सैनिक जाने की तैयारी कर रहे हैं और साथ ही कई गैर सरकारी संगठन भी अपना काम समेट रहे हैं, वे लोग ये सारा सामान फेंक रहे हैं. ये फेंका हुआ सामान अफगान व्यापारियों के पास से काबुल होते हुए पेशावर पहुंच जाता है. पेशावर के एक व्यापारी इनायत खान ने डॉयचे वेले को बताया कि सारा सामान अमेरिका में ही बना हो यह जरूरी नहीं, "बहुत सारा सामान चीन में बना है, दुकानदार उन पर सिर्फ मेड इन अमेरिका का लेबल लगा कर महंगे दामों में बेच रहे हैं."

रिपोर्टः फरीदुल्लाह खान/आभा एम

संपादनः एन रंजन

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