1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

पाकिस्तान में ईरानी तेल की तस्करी

ट्रकों से, ड्रम में रख कर खच्चरों की पीठ पर और कुछ न मिले तो पेप्सी की बोतलों में भर कर बच्चों के हाथों, पश्चिमी देशों के प्रतिबंध की मार झेल रहे ईरान से बलूचिस्तान के रास्ते पाकिस्तान में तेल की तस्करी यूं हो रही है.

default

x

ईरानी तेल की अवैध बिक्री इलाके में फलफूल रही है. इसमें फायदा इतना बड़ा है कि अफगानिस्तान के पुराने अफीम तस्करों ने भी अपना पारंपरिक धंधा छोड़ कर इसका रुख करना शुरू कर दिया है. पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की सख्ती जैसे जैसे बढ़ रही है, पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में नए नए तस्करों का उदय हो रहा है.

ईरान की सीमा पर पाकिस्तानी शहर मांद में अफीम के एक पूर्व तस्कर ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, "जब आप डीजल की तस्करी से भी उतना ही पैसा कमा सकते हैं तो अफीम की तस्करी क्यों की जाए. यह ज्यादा सुरक्षित भी है. इसके अलावा मुझे अब एक सफल व्यापारी कहा जाता है, नशीली दवाएं बेचने वाला नहीं."

बलूचिस्तान के अवैध कारोबार में डीजल की तस्करी लंबे समय से शामिल रही है. यहां नशीली दवाओं से लेकर, बंदूक, ड्यूटी फ्री सिगरेट और पुरानी टोयोटा गाड़ियों के अवैध कारोबार के तार पूरी दुनिया की अपराध जगत की अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं हालांकि इन दिनों सबसे ज्यादा मुनाफा ईरानी तेल के अवैध कारोबार से हो रहा है. बढ़ते प्रतिबंधों ने तेल के काले कारोबार को और ज्यादा मुनाफे वाला बना दिया है.

बड़े बड़े हाथ !

इस काम में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के शामिल होने की भी बातें कही जा रही हैं. डीजल की तस्करी करने वालों को यहां कानून का डर नहीं. सीमांत शहर नुश्की में सड़क के रास्ते डीजल लेकर आने वाले एक ट्रांसपोर्टर ने कहा, "इस रास्ते से डीजल लेकर आना बहुत किफायती है और बड़ा फायदा होता है. सीमा पर सारे शहरों में सुरक्षा बलों की चौकी है लेकिन मुझे आज तक किसी ने नहीं रोका तो फिर मैं यह काम क्यों न करूं."

ईरान और अफगानिस्तान के बीच पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत का एक बड़ा हिस्सा आता है. क्षेत्रफल के लिहाज से यह बहुत बड़ा प्रांत है लेकिन आबादी बहुत कम और बिखरी हुई है. सीमावर्ती होने के कारण यहां नशीली दवाओं के तस्करों का खूब बोलबाला है. इसके अलावा यहां चरमपंथियों की भी खूब चलती है जो बलूच लोगों के लिए अलग देश बनाने के लिए अभियान चला रहे हैं. यहां से नशीली दवाओं के तस्कर अफगान अफीम और हेरोइन को दुनिया भर के बाजारों तक पहुंचा रहे हैं.

पाकिस्तान में तस्करी के जरिए ईरान से करीब हर साल 27 से 30 लाख टन तेल पहुंचता है. पाकिस्तान की सरकारी कंपनी हर साल करीब करीब इतना ही तेल कुवैत पेट्रोलियम कॉर्प से खरीदती है. 2010 में जब ईरान की सरकार ने ईंधन पर सब्सिडी घटा दी थी तो तेल का अवैध कारोबार ठंडा पड़ गया था. आयातकों को मुनाफा कम हो गया था लेकिन पिछले सितंबर में प्रतिबंधों के सख्त होने के बाद से तस्करों की खूब बन आई है.

कौड़ियों के भाव

पाकिस्तानी खरीदारों को खूब सस्ता डीजल मिल रहा है. ईरान करीब 16 रुपये (पाकिस्तानी मुद्रा) प्रति लीटर की दर से अपना डीजल बेच रहा है पाकिस्तान में इतने में एक लीटर मिनरल वाटर भी नहीं मिलता. पाकिस्तान में तस्करी के रास्ते पहुंचा यह तेल करीब 104 रुपये प्रति लीटर की दर से बिकता है. हालांकि आधिकारिक रूप से बिकने वाला डीजल 112 रुपये प्रति लीटर है.

बलूचिस्तान में डीजल के कारोबारी इतना पैसा बना रहे हैं कि यात्रियों को ढोने वाले कई ट्रांसपोर्टर अपनी बसें बेच कर ट्रक खरीद रहे हैं. जोगर में ग्रेनाइट पहाड़ों के दूसरी ओर से छोटे छोटे बच्चे बोतलों में भरकर ईरानी डीजल ला रहे हैं जबकि कुछ लोग इसे ढोने के लिए खच्चरों तक का इस्तेमाल कर रहे हैं.

इसी तरह बलूचिस्तान के तट पर तस्करी औद्योगिक स्तर पर हो रही है जहां बड़े बड़े जहाजों में भर कर ओमान की खाड़ी के रास्ते अवैध तेल लाया जा रहा है. सहायक नदियों और नहरों की तरह तस्कर जहाज से उतरे तेल को ड्रमों में भर कर तेल के डिपो तक पहुंचाया जाता है और फिर उसे टैंकरों में भरा जाता है. अवैध रास्ते से कितना तेल बलूचिस्तान पहुंच रहा है इसे नापने का सही तरीका तो नहीं लेकिन कारोबारियों का मानना है कि 25 से 40 हजार लीटर की क्षमता वाले 100 से 130 टैंकर हर दिन बलूचिस्तान में तेल लेकर आ रहे हैं. यहां से तेल पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बाजारों में जाता है.

इन सबके बीच पाकिस्तान और ईरान ऊर्जा के लिए सहयोग बढ़ाने में जुटे हैं जिससे अमेरिकी सरकार भी चिंता में हैं. अमेरिका ने ईरान के प्राकृतिक गैस को पाकिस्तान पाइपलाइन के जरिए पहुंचाने के लिए हुए करार पर भी अपना विरोध जताया है लेकिन पाकिस्तान इसे बिजली की कमी से जूझने के लिए जरूरी बता रहा है.

एनआर/एजेए (रॉयटर्स)

DW.COM