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जर्मन चुनाव

पाकिस्तान में अविश्वास प्रस्ताव के आसार नहीं

पाकिस्तान में संकट से जूझ रही प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी सरकार को विपक्ष की ओरर से राहत मिली है. सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी पीएमएल (एन) ने साफ किया है कि वह सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाएगी.

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संकट में गिलानी सरकार

पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के नेतृत्व वाली पीएमएल (एन) ने कहा है कि वह गिलानी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की मांग नहीं करेगी क्योंकि इससे देश में अस्थिरता को बढ़ावा मिलेगा. पार्टी के चेयरमैन राजा जफर-उल-हक ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि अविश्वास प्रस्ताव से पूरे देश पर असर पड़ेगा.

पिछले दिनों ही एमक्यूएम ने सत्ताधारी गठबंधन से समर्थन वापस लिया जिसके बाद गिलानी सरकार संसद में अल्पमत में आ गई है. एमक्यूएम ने पेट्रोल की कीमतें बढ़ने और भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम नहीं उठाए जाने की बात कहते हुए सरकार से समर्थन वापस लिया. पीएमएल (एन) के प्रवक्ता एहसान इकबला ने भी साफ किया है कि इस वक्त अविश्वास प्रस्ताव की कोई संभावना नहीं है. दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी चौधरी शुजात हुसैन के नेतृत्व वाली पाकिस्तान मुस्लिम लीग (क्यू) भी अविश्वास प्रस्ताव के लिए जोर नहीं डाल रही है.

इस राहत के बावजूद जानकारों को इस बात की कम ही उम्मीद है कि प्रधानमंत्री गिलानी अपना कार्यकाल पूरा कर पाएंगे जो 2013 में समाप्त हो रहा है. राजनीतिक विश्लेषक हसन असकरी रिजवी का कहना है, "सरकार कुछ समय के लिए बच सकती है, लेकिन वह आगे बनी रहेगी, यह नहीं कहा जा सकता. उन्हें समर्थन जुटाना होगा. विपक्ष उसकी राह में बराबर रोड़े खड़े करता रहेगा."

देश के राजनीतिक हालात पर चर्चा के लिए पीएमएल (एन) के नेताओं ने मंगलवार को एक बैठक बुलाई. अविश्वास प्रस्ताव की बजाय विपक्षी पार्टियां देश में नए सिरे से चुनाव कराने की मांग कर सकती हैं. नवाज शरीफ देश के सबसे लोकप्रिय राजनेताओं में से एक हैं.

रिजवी कहते हैं, "विपक्ष चाहेगा कि सरकार खुद ही गिर जाए. विपक्ष संसद में प्रधानमंत्री गिलानी पर हमले करेगा." पाकिस्तान सरकार पर बाहरी दबाव भी बढ़ रहा है. गिलानी सरकार को देश की आर्थिक हालत बेहतर करने के लिए आईएमएफ से 11 अरब डॉलर का कर्जा लेना पड़ा. ऐसे में अगर तेल के दामों में हुई बढोत्तरी वापस ली जाती है तो सरकार आर्थिक तंत्र को अनुशासित बनाने की आईएमएफ की मांग को पूरा नहीं कर पाएगी. संशोधित जनरल सेल्स टैक्स को लागू करने पर भी सरकार को विपक्षी पार्टियों की आलोचना झेलनी पड़ रही है.

उधर पाकिस्तान के तालिबान उग्रवादी देश में राजनीतिक अस्थिरता का फायदा उठा कर अपने हमले तेज कर सकते हैं. पाकिस्तान पर इस्लामी चरमपंथियों को नियंत्रित करने के लिए अमेरिका का अत्यधिक दबाव है. हालांकि मौजूदा राजनीतिक उथल पुथल को अमेरिका ने पाकिस्तान का अंदरूनी मामला बताया है.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए कुमार

संपादनः ए जमाल

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