1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

पाकिस्तान जाकर दोटूक बात करेंगे राजनाथ

तल्ख रिश्तों और कश्मीर के तनाव के बीच भारतीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह पाकिस्तान जाएंगे. सार्क देशों के गृह मंत्रियों की बैठक में सिंह आतंकवाद का मुद्दा उठाएंगे.

कश्मीर के मुद्दे को पाकिस्तान की कारस्तानी बताने वाले भारतीय गृह मंत्री यह पहला पाकिस्तान दौरा होगा. वह 3 और 4 अगस्त को साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन (सार्क) की बैठक में शिरकत करेंगे. बैठक में भारत का क्या नजरिया होगा, इसका संकेत देते हुए सिंह ने कहा, "मैं अपने पड़ोसी से कहूंगा कि हमारे युवाओं को हथियार उठाने के लिए भड़काना सही नहीं है."

कश्मीर समस्या पर डॉयचे वेले विशेष

भारतीय राज्य जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में उच्च स्तरीय बैठक करने के बाद राजनाथ सिंह ने कहा, "जम्मू कश्मीर में जो स्थिति है उसे देखने के लिए हमें किसी तीसरे पक्ष को शामिल करने की जरूरत नहीं है." भारतीय गृह मंत्री के मुताबिक पाकिस्तान खुद आतंकवाद से पीड़ित है, लिहाजा उसे कश्मीर में हिंसा को बढ़ावा नहीं देना चाहिए.

(देखिये, आतंकी हमलों का भारत पाकिस्तान संबंधों पर असर)

भारत प्रशासित कश्मीर में 8 जुलाई को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकवादी बुहरान वानी की मौत हो गई. 22 साल के वानी के मौत के बाद से कश्मीर घाटी में तनाव है. श्रीनगर और आस पास के इलाकों में हो रहे हिंसक प्रदर्शनों में 45 लोग मारे जा चुके हैं और 3,000 से ज्यादा घायल हैं. नई दिल्ली का आरोप है कि पाकिस्तान कश्मीरी युवाओं को हिंसा के लिए उकसा रहा है.

इस साल जनवरी में भारत के पठानकोठ एयरफोर्स बेस पर भी आतंकवादी हमला हुआ. तीन दिन तक चली उस कार्रवाई में सात सुरक्षाकर्मियों की जान गई थी. पठानकोट हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच उच्च स्तरीय वार्ता रद्द कर दी गई. परमाणु शक्ति संपन्न दोनों पड़ोसी देशों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता 2008 के मुंबई हमलों के बाद से ही बंद है. बीच बीच में दोनों देशों ने बतचीत बहाली की कोशिश की लेकिन आतंकी हमलों के चलते उन पर पानी फिर गया.

बैठकों की ही तरह सार्क सम्मेलन भी भारत और पाकिस्तान के आपसी तनाव का शिकार रहे हैं. अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका सार्क के सदस्य हैं. आपसी सहयोग, कारोबार और परिवहन को बेहतर करने के लक्ष्य से सार्क अभी बहुत दूर दिखता है.

DW.COM

संबंधित सामग्री