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दुनिया

पाकिस्तान को आतंकवाद से खतरा है या वैलेटाइंस डे से?

एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आतंकवादी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की बजाय अब पाकिस्तान इस्लामी गुटों को खुश करने के लिए वैंलेटाइंस डे जैसे आयोजनों पर प्रतिबंध लगाने को अधिक तवज्जो दे रहा है.

पाकिस्तान के लाहौर शहर में सोमवार को हुए आतंकी हमले में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई.

तो दूसरी तरफ मंगलवार को पुलिस शहरों में ऐसे युवाओं को गिरफ्तार करती नजर आई जो वसंतोत्सव के लिए पतंगें खरीद रहे थे या फिर जिनके हाथों में वैलेंटाइंस डे के मौके पर दिल जैसा दिखने वाला गुब्बारा या चॉकलेट नजर आ रही थी.

वैसे तो इन दोनों मामलों में कोई संबंध नहीं दिखता लेकिन आज पाकिस्तान की जमीनी हकीकत कुछ ऐसी ही नजर आ रही है और यही पाकिस्तानियों के गुस्से का कारण भी है. इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने वैलेंटाइंस डे सेलिब्रेशन को अशिष्ट, अनैतिक और इस्लामिक शिक्षा के खिलाफ मानते हुए इस पर बैन लगा दिया था.

सरकार विरोधी लेखों के लिए मशहूर इस्लामाबाद के सामाजिक कार्यकर्ता अरशद महमूद ने इस फैसले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा, "इस्लामी कट्टरपंथी संगठन चाहे कहीं भी हमला कर सकते हैं क्योंकि हमारे देश के नीति-निर्माताओं और सरकार को इन संगठनों के बजाय दिल के आकार वाले गुब्बारों से अधिक खतरा महसूस होता है."

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कई सालों से पाकिस्तान ऐसे हमले झेल रहा है लेकिन अपनी सुरक्षा व्यवस्था में खामियां तलाशने के बजाय हमेशा ही वह भारत और अफगानिस्तान को जिम्मेदार ठहराता रहा है. लाहौर हमले की जिम्मेदारी आतंकवादी गुट जमात-उल-अहरार ने ली है. लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान भारतीय खुफिया एजेंसियों को इसके लिए जिम्मेदार मान रहा है. कुछ तो इसे लाहौर में होने वाले संभावित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट के खिलाफ रची गई साजिश मान रहे हैं. 2009 में श्रीलंकाई टीम पर हमले के बाद से पाकिस्तान में कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं हुआ है.

पाकिस्तानी स्तंभकार फाजी जाका ने लाहौर हमले और क्रिकेट के खिलाफ साजिश की थ्योरी को बकवास करार दिया है. विशेषज्ञ तो यह भी मानते हैं कि भारत और अफगानिस्तान जैसे देश भी आतंकवादी हमलों के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहरा देते हैं और अपनी कमियों को नजरअंदाज करते हैं. सामाजिक कार्यकर्ता जीनिया शौकत ने डीडब्ल्यू से बातचीत में कहा कि दुर्भाग्य तो यह है कि मीडिया भी इन हमलों को विदेशी हमला कह देता है.

पाकिस्तानी विशेषज्ञ अकील शाह और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार विक कैरी के मुताबिक पाकिस्तानी सेना के आतंकवाद विरोधी दृष्टिकोण में एक मौलिक विरोधाभास है. उनका कहना है कि पाकिस्तानी सेना उन आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करती है जो पाकिस्तान पर हमला करते हैं लेकिन उन गुटों की सरपरस्ती करती है जो इसके दुश्मन मुल्कों पर हमला करते हैं. मसलन हक्कानी नेटवर्क जो अफगानिस्तान में दबदबा बनाए रखने में इस्लामाबाद की मदद करता है, वहीं लश्कर-ए-तैयबा को भी कथित रूप से कश्मीर में भारतीय सुरक्षा बलों के खिलाफ पाकिस्तान से प्रोत्साहन मिलता रहा है.

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