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जर्मन चुनाव

पाकिस्तानी कश्मीर के कैंप में विदेशी मुस्लिम लड़ाके

पाकिस्तानी कश्मीर में चल रहे आतंकी कैंपों में सैकड़ों यूनिवर्सिटी छात्र जिनमें विदेशी भी हैं ट्रेनिंग ले रहे हैं. भारत के खिलाफ जिहाद छेड़ने के लिए कैंप सक्रिय हो गए हैं. लंदन से जारी रिपोर्ट में यह बात कही गई है.

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कुछ महीनों के ठहराव के बाद कई आतंकी संगठनों ने एक बार फिर सिर उठाया है और पाकिस्तानी कश्मीर की राजधानी मुजफ्फराबाद के आस पास इलाकों में कई आतंकी कैंप सक्रिय हो गए हैं. मुजफ्फराबाद में शहर की सड़कों पर जिहाद के समर्थन में लिखे गए नारे खूब नजर आ रहे हैं. ब्रिटेन की एक प्रमुख समाचार सेवा ने यह खबर दी है.

मुजफ्फराबाद स्थित ट्रेनिंग कैंप में ट्रेनिंग ले चुके लाहौर के एक इंजीनियरिंग छात्र से बातचीत के आधार पर यह रिपोर्ट प्रकाशित हुई है. इस छात्र ने बताया, "बड़ी संख्या में पाकिस्तान और विदेशों के यूनिवर्सिटी छात्र ट्रेनिंग ले रहे हैं. ट्रेनिंग देने वाला आतंकी संगठन भारत के खिलाफ जिहाद की तैयारी में जुटा है." खुद को कश्मीरी बताने वाले इस छात्र ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद दो महीने तक इन कैंपों में ट्रेनिंग ली. उसका कहना है, "कैंप में मौजूद छात्रों में करीब 20 फीसदी कश्मीर के हैं और 10 फीसदी विदेशों से आए हैं. कैंप में ज्यादातर छात्र पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से आए हैं."

इस छात्र का यह भी दावा है कि उसकी यूनिवर्सिटी के कई छात्रों ने लाहौर के नजदीक एक आतंकी गुट के ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लिया है. छात्र का इशारा जमात उद दावा की तरफ है जिसका मुख्यालय लाहौर के पास मुरीदके में है. उसका यह भी कहना है कि उसे कश्मीर भेजने का फैसला इस गुट से जुड़ा आमिर नाम का कोई शख्स करेगा.

छात्र ने अपनी तरफ से दावा किया कि उसका परिवार उसके फैसले के साथ है लेकिन जब ब्रिटिश समाचार एजेंसी ने उसकी मां से बात की तो जवाब कुछ और ही मिला. छात्र की मां ने कहा, "मेरे बेटे ने मुझसे इस्लाम का प्रचार करने की इजाजत मांगी थी. लेकिन मुझे नहीं पता कि वह किसी जिहादी गुट से जुड़ गया है. ट्रेनिंग करके लौटने पर उसने मुझे इसके बारे में बताया तब मैंने उससे कहा जब तक मैं जिंदा हूं तुम कश्मीर में लड़ने के लिए नहीं जा सकते."

इस छात्र के बयान से पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक के उस दावे पर सवाल उठ गए हैं जिसमें उन्होंने पाकिस्तानी कश्मीर में आतंकी कैंपों के न होने की बात कही थी.

रिपोर्टः एजेंसियां/एन रंजन

संपादनः उ भ

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