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दुनिया

पाकः राहत शिविरों में राहत की कमी

पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर प्रांत में सहायता दे रहीं अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों का कहना है कि सरहदी सूबे में सैन्य कार्रवाई की वजह से बेघर हुए 13 लाख लोगों की राहत के लिए पैसे ख़त्म होते जा रहे हैं.

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राहत मे कमी

2009 में तालिबान विद्रोहियों को खदेड़ने के लिए पाकिस्तान की सेना ने कार्रवाई शुरू की थी. स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय राहत संगठनों की संस्था पाकिस्तान ह्यूमेनिटेरियन फोरम (पीएचएफ) का कहना है कि लड़ाई से विस्थापित हुए लोगों के लिए संयु्क्त राष्ट्र ने देशों से लगभग 55 करोड़ डॉलर की मांग की थी लेकिन अब तक केवल 17 करोड़ डॉलर की राहत मिली है.

Flash-Galerie Pakistan: Flüchtlinge aus Waziristan

13 लाख बेघर

पिछले साल स्वात घाटी में कार्रवाई से लगभग 30 लाख लोगों को बेघर होना पड़ा था. इनमें से आधे लोग वापस अपने इलाकों में जा कर बस गए हैं लेकिन सैन्य कार्रवाई के बढ़ने से और लोग घरों से भाग रहे हैं. पीएचएफ ने अपने रिपोर्ट में लिखा है, "13 लाख से ज़्यादा बेघर हो गए हैं और अपनी ज़िंदगी के लिए राहत पर निर्भर हैं. फिर भी राहत कार्यों के लिए पैसा ख़त्म होता जा रहा है."

जहां सैन्य कार्रवाई और इलाकों में की जा रही है वहीं पैसों की कमी की वजह से एजेंसियों को राहत कार्य रोकने पड़े हैं. पीएचएफ की कैटलीन ब्रेडी का कहना है कि मानवीय संकट को ख़त्म होने में देर लगेगी और लाखों लोगों अब भी राहत की ज़रूरत है. पीएचएफ की रिपोर्ट के मुताबिक 1 करोड़ 30 लाख लोग अब भी बेघर हैं. पिछले एक महीने में ओरकज़ई और खुर्रम इलाकों में हो रही कार्रवाई से बचने के लिए लगभग 800 परिवार हंगू और कोहट ज़िलों में आ गए हैं.

स्वास्थ्य,सफाई और आर्थिक मदद से संबंधित कार्य़क्रमों को या तो बंद किया जा रहा है या फिर उनके जल्द बंद होने का डर है. ब्रेडी कहती हैं, "वैसे ही कई लोगों को उनकी ज़रूरतों के हिसाब से मदद नहीं दी जा रही और अब हमें और कार्यक्रमों को पैसों की कमी की वजह से बंद करना पड़ रहा है."

रिपोर्टः एजेंसियां/ एम गोपालकृष्णन

संपादनः आभा मोंढे