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विज्ञान

पहले के मुकाबले ज्यादा जी रहे हैं लोग

जहां 1990 में दुनिया भर में लोगों की औसत आयु 65.3 साल थी वहीं 2013 में यह बढ़कर 71.5 हो गई. अमेरिकी रिसर्चरों के मुताबिक लीवर कैंसर और गुर्दे की भयानक बीमारियों के बढ़ने के बावजूद दुनिया भर में लोगों की औसत आयु बढ़ी है.

1990 से 2013 के बीच दुनिया भर में लोगों की औसत उम्र बढ़ी हैं. पुरुषों की जीवन प्रत्याशा औसतन 5.8 साल जबकि महिलाओं की जीवन प्रत्याशा 6.6 साल बढ़ गई है. रिसर्चर बताते हैं कि इस वृद्धि के पीछे एक अहम कारण है कैंसर जैसी बीमारियों से होने वाली मौतों में कमी आना.

दुनिया के अमीर इलाकों में कैंसर से होने वाली मौतों में 15 फीसदी और हृदय संबंधी रोगों से होने वाली मौतों में 22 फीसदी कमी हुई है. स्वास्थ्य पत्रिका लैंसेंट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों में इसका श्रेय डायरिया, श्वास रोग और नवजातों की बीमारियों में आई कमी को जाता है.

हालांकि उप-सहारा अफ्रीका में ऐसा नहीं हुआ है. एचआईवी और एड्स के लगातार बढ़ रहे मामलों से वहां जीवन प्रत्याशा में कमी आई है. वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में वैश्विक स्वास्थ्य के प्रोफेसर डॉक्टर क्रिस्टोफर मरे मानते हैं, "बहुत सारी बीमारियों के खिलाफ हम जो सफलता देख रहे हैं वह अच्छी बात है, लेकिन हम इससे कहीं ज्यादा बेहतर कर सकते हैं और हमें करना भी चाहिए." वह मानते हैं कि डायरिया, चेचक, टीबी, मलेरिया और एचआईवी/एड्स जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए दी जा रही आर्थिक मदद ने लोगों के जीवन को लंबा बनाने में अहम योगदान दिया है.

शोध में पाया गया कि कई जानलेवा बीमारियों से मौत के मामलों में बढ़ोतरी भी हुई है, जैसे हिपेटाइटिस सी के कारण होने वाला लीवर कैंसर 1990 के मुकाबले 125 फीसदी बढ़ चुका है. इसके अलावा किडनी की समस्याओं में 37 फीसदी वृद्दि हुई है, डायबिटीज 9 फीसदी और आंतों के कैंसर के मामले 7 फीसदी बढ़े हैं. बीमारियों के वैश्विक बोझ के बारे में 2013 की रिपोर्ट में पाया गया कि कम आमदनी वाले देशों जैसे नेपाल, रवांडा, इथियोपिया, नाइजीरिया, मालदीव और ईरान में पिछले 23 सालों में इन भयानक बीमारियों ने खूब पैर पसारे हैं.

भारत में भी जीवन प्रत्याशा में अच्छी वृद्धि देखने को मिली है. भारत में 1990 और 2013 के बीच पुरुषों की औसत आयु 7 साल और महिलाओं की 10 साल तक बढ़ी है. लेकिन साथ ही रिसर्च में पाया गया कि भारत में आत्महत्या के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है. दुनिया भर में होने वाले आत्महत्या के कुल मामलों में से आधे सिर्फ भारत और चीन में ही हो रहे हैं.

एसएफ/आरआर (एएफपी)

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