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दुनिया

पहली लूथरवादी महिला बिशप ने इस्तीफा दिया

दुनिया की पहली लूथरवादी महिला बिशप को चर्च में उठे एक सेक्स स्कैंडल की वजह से इस्तीफा देना पडा है. 65 साल की मारिया येप्सन जर्मनी के हैम्बर्ग में काम कर रही थीं.

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सवालों में विश्वसनीयताः येप्सन

मारिया को एक पादरी पर बच्चों का यौन शोषण करने के आरोप लगने के बाद इस्तीफा देना पड़ा है. इस पादरी पर आरोप है कि उसने 1970 और 1980 के दशक में कई बच्चों का यौन शोषण किया. मारिया को इस बात का कई बरसों से पता था, लेकिन वह चुप रहीं. यह बात जब सामने आई तो मारिया की कड़ी आलोचना हुई.

शुक्रवार को उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेंस कर अपने इस्तीफे की घोषणा की. उन्होंने कहा, "मेरी विश्वसनीयता अब सवालों के घेरे में है. इसलिए अब मैं उस कर्तव्य का पालन करने की स्थिति में नहीं हूं, जिसका वादा मैंने ईश्वर और अपनी संस्था से किया था."

मीडिया में इस तरह की खबरें आई थीं कि 46 साल की एक महिला ने पादरी पर 1979 से 1984 के बीच लगातार उसका यौन शोषण करने का आरोप लगाया था. खबरों के मुताबिक जब चर्च के वरिष्ठ लोगों ने पादरी से इस बारे में पूछताछ की तो उसने अपनी गलती मान ली थी.

इस पीड़ित महिला ने यह भी कहा था कि उसने अपने साथ हुए शोषण की बात 1999 में ही मारिया येप्सन को बताई थी. येप्सन ने कहा, “महिला ने इतना ही बताया था कि पादरी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया. असल में क्या हुआ, इसका पता मुझे भी इसी साल चला.“ येप्सन ने कहा कि यौन शोषण के मामले जल्द से जल्द सुलझाए जाने चाहिए.

1992 में येप्सन को लूथरवादी चर्च ने बिशप चुना था. वह पहली महिला लूथरवादी बिशप बनी थीं. 2002 में उन्हें 10 साल का दूसरा कार्यकाल दिया गया. लूथरवादी चर्च पश्चिमी चर्च का अहम हिस्सा है. यह चर्च 16वीं सदी में हुए जर्मनी के मशहूर‍ सामाजिक कार्यकर्ता मार्टिन लूथर के विचारों को मानता है.

रिपोर्टः एजेंसियां/वी कुमार

संपादनः ए कुमार

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