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दुनिया

पश्चिम जैसे आधुनिक हथियार बनाने लगा है चीन

आधुनिक हथियार बनाने में चीन ने पश्चिम की तकरीबन बराबरी कर ली है. डिजायन, निर्माण और बिक्री में भी अब चीन रूस और पश्चिम को टक्कर दे रहा है.

चीन ने हमलावर ड्रोनों समेत कई तरह के हथियार बेचने शुरू कर दिये हैं. एक प्रेजेंटेशन के दौरान लंदन में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटजिक स्ट्डीज (IISS) के निदेशक जॉन चिपमैन ने कहा, "चीन के सैन्य विकास से पता चलता है कि एडवांस हथियार सिस्टम के मामले में अब पश्चिम के दबदबे को जस का तस नहीं माना जा सकता."

उन्होंने दुनिया में चीनी हथियारों की बढ़ती बिक्री पर भी चिंता जताई, "पश्चिम की तैनात फौजों के सामने एक उभरता खतरा यह है कि चीन विदेशों में बिक्री बढ़ाना चाहता है, हो सकता है कि आने वाले दिनों में पश्चिमी सेना को ज्यादा जगहों पर अत्याधुनिक हथियारों का सामना करना पड़े."

IISS की रिपोर्ट के मुताबिक हवाई ताकत के मामले में भी चीन पश्चिम को टक्कर देने की स्थिति में आ चुका है. कुछ मामलों में तो वह आगे निकल चुका है. बीजिंग की एयर टू एयर मिसाइल का हवाला देते हुए चिपमैन ने कहा कि उसकी छोटी दूरी की ऐसी मिसाइलों का पश्चिम के पास कोई जवाब नहीं है, "सिर्फ कुछ ही एयरोस्पेस के माहिर देश ये बना सकते हैं." रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि चीन हवा से हवा में मार करने वाली दुनिया की सबसे लंबी दूरी की मिसाइल बना रहा है.

चीन पाकिस्तान समेत अफ्रीका के कई देशों को हथियार बेच रहा है. इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटजिक स्ट्डीज के मुताबिक अफ्रीकी देश भी सोवियतकालीन डियाजनों को खरीदने के बजाए अब चीन में तैयार डिजायन ले रहे हैं. नाइजीरिया और सऊदी अरब जैसे देश तो बीजिंग के हमलावर ड्रोनों का इस्तेमाल भी कर रहे हैं.

चीन की बढ़ती ताकत पश्चिम के साथ साथ भारत, जापान और दक्षिण कोरिया को चुभ रही है. 2016 में चीन का रक्षा बजट 145 अरब डॉलर था. रकम के लिहाज से यह दक्षिण कोरिया और जापान के कुल रक्षा बजट से 1.8 गुना ज्यादा था. चिपमैन कहते हैं कि शीत युद्ध खत्म होने के बाद पश्चिमी देशों ने अपनी सेना और उपकरणों में काफी कटौती की, लेकिन अब सैन्य मशीनरी को अपग्रेड करने पर ध्यान देने की जरूरत है.

ओएसजे/एमजे (एएफपी)

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