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खेल

पश्चिमी जर्मनी में डोपिंग का तंत्र!

पश्चिमी जर्मनी में सरकार की मदद से तंत्र बना कर सालों तक डोपिंग होती रही. बर्लिन की एक यूनिवर्सिटी की रिसर्च में यह बात सामने आने पर राजनेताओं ने चिंता जताई है और पूरा मामला साफ करने को कहा है.

कम्युनिस्ट पूर्वी जर्मनी में सरकार की शह पर डोपिंग की बात तो पहले से ही कही जाती रही है, लेकिन एक अखबार ने यूनिवर्सिटी की रिसर्च का हवाला देकर कहा है कि पश्चिमी जर्मनी में भी ऐसा होता था और वो भी "खतरनाक स्तर" तक. बर्लिन की हुम्बोल्ट यूनिवर्सिटी की एक टीम ने तीन साल के रिसर्च और 50 से ज्यादा गवाहों का इंटरव्यू करने के बाद 800 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है. "जर्मनी में 1950 से अब तक डोपिंग" नाम की यह रिपोर्ट अभी छपी नहीं है. जर्मन अखबार ज्युडडायचे साइटुंग ने इसी स्टडी के एक साल पुराने संस्करण को देखा है और इसके आधार पर खबर छापी है कि एथलेटिक्स और फुटबॉल समेत कई खेलों में डोपिंग होती थी. (डोपिंग के घेरे में ऑस्ट्रेलिया)

रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर 1970 में इंस्टीट्यूट फॉर स्पोर्ट साइंस के बनने के बाद डोपिंग का बकायदा तंत्र बन गया. इंस्टीट्यूट ने खेल विज्ञान और खेल फेडरेशन से जुड़े बड़े लोगों को जुटाया और दशकों तक खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने वाली चीजों पर परीक्षण किए. इनमें एनाबॉलिक एस्टेरॉयड से लेकर खून बढ़ाने वाले एरिथ्रोप्रोटीन (ईपीओ) तक शामिल थे.

Toni Schumacher

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उस वक्त के कुछ राजनेता इस डोपिंग के बारे में जानते थे. एक गवाह ने किसी गृह मंत्री को यह कहते बताया है, "हमारे एथलीटों को उन्हीं शर्तों और नियमों को मानना होगा जैसा पूर्वी हिस्से के एथलीट मानते थे." रिपोर्ट के मुताबिक महिलाएं और बच्चों की भी डोपिंग होती थी. इसमें 1970 से पहले और बाद के फुटबॉल पर भी संदेह जताया गया है. फीफा के एक अधिकारी के लिखे पत्र के मुताबिक 1996 वर्ल्ड कप के फाइनल में इंग्लैंड के साथ मुकाबले से पहले तीन पूर्वी जर्मन खिलाड़ियों में एफेड्रीन की मात्रा मिली थी.

रिपोर्ट के सामने आने के बाद अलग अलग पार्टियों के नेताओं ने इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है. जर्मनी की प्रमुख विपक्षी पार्टी सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी के सांसद थोमस ओपरमन ने कहा है, "मैं जानना चाहता हूं, इसमें क्या है?" चांसलर अंगेला मैर्केल की क्रिश्चियन डेमोक्रैटिक पार्टी के नेता वोल्फगांग बोसबाख ने वेल्ट अम सोन्टाग अखबार से कहा है कि इस तरह की गतिविधियों को, "किसी भी रूप में उचित नहीं माना जा सकता है, ना ही इसे माफ किया" जा सकता है. सत्ताधारी गठबंधन में शामिल फ्री डेमोक्रैटिक पार्टी के योआखिम गुंथर ने तो संसद के निचले सदन की खेल समिति की एक विशेष बैठक बुलाने की मांग की है. गुंथर ने बयान जारी कर कहा है, "खेल को उचित परिस्थितियों में आगे बढ़ना चाहिए. इसलिए रिसर्च में जिन घटनाओं का जिक्र है उन पर विस्तृत सफाई जरूरी है."

पूर्वी जर्मनी के साइक्लिस्ट उवे ट्रोएमर भी डोपिंग के शिकार रहे हैं. उन्हें इन दावों पर हैरानी नहीं हुई. ट्रोएमर का कहना है, "हम सालों से यह जानते हैं कि पश्चिमी जर्मनी में डोपिंग होती थी."

पूर्व गृह मंत्री हंस डिट्रीश गेंशर ने एक अखबार से कहा कि वे इस बात को "बिल्कुल असंभव" मानते हैं कि राजनेताओं ने जर्मन एथलीटों पर 1972 के म्युनिख ओलंपिक से पहले डोपिंग के लिए दबाव डाला. जर्मन अखबार बिल्ड अम सोन्टाग ने उनका बयान छापा है, "मुझे नहीं मालूम कि किन लोगों ने इस तरह का दबाव डाला." 1961 से 1992 तक नेशनल ओलंपिक कमेटी के महासचिव रहे वाल्थर ट्रोएगर ने भी इस बात से इनकार किया है कि पश्चिम जर्मनी में डोपिंग का तंत्र था.

जर्मन गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस बारे में कहा है कि मंत्रालय को, "जर्मनी के दोनों हिस्सों में अतीत में हुई डोपिंग के बारे में पूरी तरह से पता लगाने और स्पष्टीकरण देने में गहरी रुचि है" और इस रिसर्च को सार्वजनिक किया जाना चाहिए.

एनआर/एमजे (एएफपी, डीपीए, एपी)

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